शहरी चौपाल ब्यूरो
शामली। जिले में लावारिस कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहर, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में सोमवार को कई मासूम बच्चों समेत 128 लोगों को कुत्तों ने काटकर घायल कर दिया। सभी घायलों ने विभिन्न सरकारी अस्पतालों में पहुंचकर एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाए। लगातार बढ़ रही घटनाओं से लोगों में दहशत का माहौल है।
सीएचसी शामली में 93 मरीजों को लगे इंजेक्शन
सीएचसी शामली में सोमवार को 93 मरीजों को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए गए। फार्मासिस्ट पूजा बजाज के अनुसार इनमें से 33 मरीजों को पहला इंजेक्शन लगाया गया। नई मंडी क्षेत्र में 25 वर्षीय रजत को सड़क पर जाते समय कुत्ते ने काट लिया। इसके अलावा 17 वर्षीय वंश, 28 वर्षीय विकास (भैंसवाल), छह वर्षीय सियान, 12 वर्षीय आयान, सात वर्षीय महक, तीन वर्षीय निष्ठि और दो वर्षीय आयांग सहित कई बच्चों को पहला टीका लगाया गया।
सिंभालका निवासी नौ वर्षीय शिवा, मुंडेट निवासी 26 वर्षीय रविना, दयानंद नगर निवासी 48 वर्षीय मुकेश, 33 वर्षीय नवाब और 11 वर्षीय राधिका को भी पहला इंजेक्शन दिया गया। जिला अस्पताल में सात मरीजों को पहला एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाया गया।
कांधला, कैराना और अन्य क्षेत्रों में भी बढ़े मामले
कांधला सीएचसी में 57 मरीजों को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए गए, जिनमें 22 को पहला टीका लगा। गांव श्यामगढ़ी निवासी सत्येंद्र के पांच वर्षीय पुत्र देव कुमार का कुत्ते के हमले के बाद दिल्ली के अस्पताल में उपचार कराया गया।
कैराना सीएचसी में प्रतिदिन 60-70 मरीज कुत्ते व बंदर के काटने पर उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। सोमवार को करीब 20 मरीजों को पहला इंजेक्शन लगाया गया। मोहल्ला रेतावाला निवासी 10 वर्षीय आयान और मोहल्ला कलालान निवासी 12 वर्षीय उजेफा को भी कुत्तों ने घायल कर दिया।
थानाभवन सीएचसी में 11, ऊन सीएचसी में 21 (सात को पहला इंजेक्शन), झिंझाना सीएचसी में 14, जबकि जलालाबाद व बाबरी पीएचसी में भी कई मरीजों को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए गए। ऊन सीएचसी में इस माह अब तक 471 लोगों को रेबीज के टीके लगाए जा चुके हैं।
290 कुत्तों का हुआ बधियाकरण
लावारिस कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए नगरपालिका ने एक निजी संस्था के साथ अनुबंध किया है। सफाई निरीक्षक अनिल चौधरी के अनुसार सिंभालका स्थित शेल्टर होम में पिछले वर्ष अक्टूबर से बधियाकरण अभियान चल रहा है। अब तक 290 कुत्तों का बधियाकरण किया जा चुका है। कुल 800 कुत्तों की नसबंदी का लक्ष्य रखा गया है। संस्था को प्रति कुत्ता 1250 रुपये की दर से भुगतान किया जाएगा तथा उपचार व भोजन की व्यवस्था भी संस्था की जिम्मेदारी होगी।
पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं इंजेक्शन
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी पर एंटी रेबीज इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। अस्पताल में आने वाले सभी मरीजों को समय पर टीके लगाए जा रहे हैं।
लगातार बढ़ रही घटनाओं को देखते हुए लोगों ने प्रशासन से लावारिस कुत्तों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।










