शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। कश्मीरी मूल के डॉक्टर आदिल अहमद की गिरफ्तारी के बाद सहारनपुर के निजी स्वास्थ्य संस्थानों में हलचल मच गई है। श्रीनगर पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार किए गए डॉ. आदिल अहमद पर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के समर्थन में पोस्टर लगाने और उग्रवादी गतिविधियों से जुड़े होने के आरोप हैं। जांच एजेंसियां उनके पुराने संपर्कों और गतिविधियों की पड़ताल कर रही हैं।

बताया गया है कि डॉ. आदिल अहमद मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग निवासी हैं और एमबीबीएस डॉक्टर हैं। वह कुछ माह पूर्व सहारनपुर के अंबाला रोड स्थित फेमस अस्पताल में कार्यरत रहे थे। इससे पहले वह वी-ब्रोस अस्पताल में भी सेवाएं दे चुके थे। गिरफ्तारी के बाद स्थानीय स्तर पर खुफिया एजेंसियों ने भी उनके सहारनपुर प्रवास और संपर्कों को लेकर जानकारी जुटानी शुरू कर दी।
इसी घटनाक्रम के बीच फेमस अस्पताल प्रबंधन ने स्वास्थ्य विभाग को आवेदन देकर अपना लाइसेंस स्वेच्छा से निरस्त करने का अनुरोध किया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार के अनुसार आवश्यक अभिलेखों की जांच के उपरांत फेमस अस्पताल का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। वहीं जिस दूसरे अस्पताल में डॉ. आदिल पहले कार्य कर चुके थे, उसके लाइसेंस निरस्तीकरण की प्रक्रिया भी जारी है।

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि डॉ. आदिल की गिरफ्तारी के बाद संस्थान की साख पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा और मरीजों की संख्या में भारी कमी आ गई, जिससे आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई। इसी कारण लाइसेंस सरेंडर करने का निर्णय लिया गया। हालांकि शहर में यह चर्चा भी जोरों पर है कि अचानक दोनों अस्पतालों द्वारा लाइसेंस निरस्तीकरण के लिए आवेदन देना कई सवाल खड़े करता है और यह स्वयं में जांच का विषय बन गया है।
जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि क्या डॉ. आदिल की गतिविधियों का किसी स्थानीय नेटवर्क से कोई संबंध था या नहीं। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और सुरक्षा एजेंसियां अपने-अपने स्तर पर कार्रवाई में जुटी हैं। पूरे प्रकरण ने सहारनपुर के स्वास्थ्य क्षेत्र और प्रशासनिक तंत्र को सतर्क कर दिया है।










