शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। पेपर मिल रोड स्थित कार्यालय पर आयोजित बैठक में भारतीय किसान यूनियन वर्मा एवं पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने कहा कि सहारनपुर मंडल की 19 चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का 1182 करोड़ रुपये भुगतान बकाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की भाजपा सरकार किसान विरोधी नीतियां अपना रही है।
भगत सिंह वर्मा ने बताया कि सहारनपुर जिले की टोडरपुर चीनी मिल पर पिछले वर्ष का भी 20 करोड़ रुपये गन्ना भुगतान बकाया है। मंडल की 19 चीनी मिलों पर देरी से किए गए भुगतान का लगभग 1800 करोड़ रुपये ब्याज भी लंबित है। वहीं सहारनपुर जिले की 9 चीनी मिलों पर 387 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य और करीब 600 करोड़ रुपये ब्याज बकाया बताया गया।
उन्होंने कहा कि शुगर कंट्रोल ऑर्डर 1966 के अनुसार जिन चीनी मिलों पर गन्ना भुगतान और ब्याज बकाया है, उन्हें बाह्य क्रय केंद्रों से दुलाई किराया काटने का अधिकार नहीं है। आरोप लगाया कि सरकार की मिलीभगत से मिल मालिक नियमों के विरुद्ध धुलाई किराया काटकर किसानों का शोषण कर रहे हैं।
वर्मा ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई को देखते हुए गन्ने का लाभकारी मूल्य कम से कम 700 रुपये प्रति कुंतल किया जाना चाहिए। उन्होंने वर्ष 1967 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी चरण सिंह द्वारा गन्ना मूल्य बढ़ाए जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में किसानों को लागत से भी कम मूल्य मिल रहा है, जिससे उनका गन्ना खेती से मोहभंग हो रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि गन्ने से बनने वाले सिरा, अल्कोहल और शराब पर सरकार को भारी मात्रा में उत्पाद शुल्क प्राप्त होता है, जबकि किसानों का भुगतान समय पर नहीं कराया जा रहा। भगत सिंह वर्मा ने महामहिम राष्ट्रपति को पत्र भेजकर गन्ने का मूल्य 700 रुपये कुंतल घोषित करने, बकाया भुगतान व ब्याज तुरंत दिलाने तथा चीनी मिलों में हो रही कथित घटतौली पर रोक लगाने की मांग की।
बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजेंद्र चौधरी ने की तथा संचालन प्रदेश सचिव मास्टर रईस अहमद ने किया। बैठक में संगठन के अनेक पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।








