कोयले के बढ़ते दामों से सहारनपुर का भट्ठा उद्योग संकट में, ईंटों के दाम बढ़ाने का फैसला

सहारनपुर के नकुड़ क्षेत्र में कोयले के बढ़ते दाम और बढ़ते खर्चों से भट्ठा उद्योग संकट में है। भट्ठा संचालकों ने ईंटों के दाम बढ़ाने और 30 जून तक फुकाई बंद करने का फैसला लिया।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

नकुड़ (सहारनपुर)। क्षेत्र में ईंट भट्ठा उद्योग इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। कोयले के लगातार बढ़ते दाम, बढ़ते टैक्स और श्रम लागत में वृद्धि के चलते भट्ठा संचालकों की परेशानी बढ़ती जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर नकुड़ क्षेत्र में ईंट भट्ठा एसोसिएशन की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें सैकड़ों भट्ठा मालिकों ने भाग लिया और अपनी चिंताओं को खुलकर व्यक्त किया।

बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि उत्पादन लागत में भारी बढ़ोतरी को देखते हुए अब ईंटों के दाम बढ़ाना आवश्यक हो गया है। इसके साथ ही भट्ठा संचालकों ने 30 जून तक भट्ठों की फुकाई बंद करने का भी ऐलान किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि उद्योग की स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि कोयले के दामों में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण उत्पादन लागत कई गुना बढ़ गई है। इसके अलावा सरकार द्वारा लगाए गए विभिन्न करों और श्रमिकों की बढ़ती मजदूरी ने भट्ठा संचालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है। ऐसी स्थिति में पुराने दामों पर ईंटों की बिक्री करना संभव नहीं रह गया है।

भट्ठा मालिकों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की ओर से इस उद्योग को लेकर कोई ठोस नीति या राहत योजना नहीं बनाई गई है। जबकि यह उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योग के रूप में हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है। इसके बावजूद बैंक ऋण, सब्सिडी या अन्य आर्थिक सहायता के अभाव में यह उद्योग धीरे-धीरे संकट की ओर बढ़ रहा है।

वक्ताओं ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और बाजार में अस्थिरता के कारण कोयले की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसका सीधा असर भट्ठा उद्योग पर पड़ रहा है। यदि जल्द ही सरकार द्वारा कोई राहत नहीं दी गई, तो आने वाले समय में कई भट्ठों का संचालन बंद हो सकता है, जिससे हजारों मजदूर बेरोजगार हो जाएंगे।

बैठक की अध्यक्षता सन्नी चौधरी ने की। इस दौरान चौधरी अर्जुन सिंह, हाजी याकूब कुरैशी, कालू प्रधान, वरुण सैनी, अकरम प्रधान, संजय सिंघल, ओमवीर चौधरी, सेठपाल चौधरी, सुरेंद्र अरोड़ा, छोटू सैनी, अंशुल मित्तल, सत्तर चौधरी, सुधीर राणा, सुरेंद्र राणा, सोहेल कुरैशी सहित सैकड़ों भट्ठा संचालक मौजूद रहे।

बैठक के अंत में भट्ठा मालिकों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो उद्योग को बचाना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि कोयले की कीमतों को नियंत्रित किया जाए, टैक्स में राहत दी जाए और भट्ठा उद्योग को आर्थिक सहायता प्रदान की जाए, ताकि यह महत्वपूर्ण उद्योग पुनः स्थिर हो सके।

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