गय्युर मलिक
बेहट (सहारनपुर)। चैत्र नवरात्रि के अष्टमी पर्व पर सिद्धपीठ Shakambhari Devi Temple में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। गुरुवार को दुर्गा अष्टमी के अवसर पर हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में मां भगवती के दर्शन के लिए उमड़ पड़े। सुबह से ही मंदिर मार्ग और शिवालिक पहाड़ियों के बीच स्थित इस पवित्र धाम में भक्तों की लंबी कतारें लग गईं, जो देर शाम तक जारी रहीं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धालुओं ने पहले बाबा भुरादेव के दर्शन किए और उसके बाद मुख्य मंदिर में पहुंचकर मां शाकंभरी के चरणों में शीश नवाया। भक्तों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर माता को भोग अर्पित किया और अपनी मनोकामनाएं मांगीं। पूरे मंदिर परिसर में “जय माता दी” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया, जिससे पूरी शिवालिक घाटी गूंज उठी।
अष्टमी के अवसर पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तों ने कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन किया, उन्हें भोजन कराया और दक्षिणा व उपहार देकर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके पश्चात व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से अपने व्रत खोले। इस दौरान कई स्थानों पर विशाल भंडारों का आयोजन भी किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस प्रशासन द्वारा मेला क्षेत्र में जगह-जगह पुलिस बल तैनात किया गया था और शाकंभरी देवी मार्ग पर लगातार गश्त की जा रही थी। भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष व्यवस्था की गई, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मंदिर व्यवस्थापक राणा अतुल्य प्रताप सिंह के नेतृत्व में मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया था। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, प्रकाश, सफाई और मार्गदर्शन की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई। प्रशासन और मंदिर समिति के संयुक्त प्रयासों से पूरा आयोजन सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
उधर, बेहट कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी दुर्गा अष्टमी का पर्व पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। घर-घर में कन्या पूजन कर बालिकाओं को देवी का स्वरूप मानते हुए भोजन कराया गया और उपहार देकर आशीर्वाद लिया गया। मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
दुर्गा अष्टमी के इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की अपार आस्था और उत्साह ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि शाकंभरी देवी धाम न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है।








