शहरी चौपाल ब्यूरो
नागल (सहारनपुर)।जनपद के नागल क्षेत्र के गांव कोटा में स्थित प्राचीन मां काली देवी मंदिर परिसर में आयोजित होने वाले तीन दिवसीय ऐतिहासिक मेले का शुभारंभ गुरुवार को विधिवत रूप से किया गया। मेले के उद्घाटन अवसर पर क्षेत्र में धार्मिक आस्था, उत्साह और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला।
मेले का शुभारंभ नागल थाना प्रभारी राजकुमार चौहान द्वारा फीता काटकर किया गया। इससे पूर्व मंदिर परिसर में विधि-विधान से हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर मां भगवती से सुख-समृद्धि की कामना की। हवन के दौरान पूरे क्षेत्र में मंत्रोच्चार और भक्ति का वातावरण बना रहा।
इस अवसर पर थाना प्रभारी राजकुमार चौहान ने कहा कि ऐसे धार्मिक मेले समाज में भाईचारा और सौहार्द को बढ़ावा देते हैं। यहां सभी धर्म और वर्ग के लोग एक साथ मिलकर मेले की शोभा बढ़ाते हैं। उन्होंने बताया कि मेले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है, साथ ही अस्थायी पुलिस चौकी भी स्थापित की गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से तुरंत निपटा जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांति व्यवस्था भंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मंदिर समिति के प्रधान कुलदीप राणा ने कहा कि मेले की व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए समिति के सभी सदस्य पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य कर रहे हैं। वहीं मेला समिति के अध्यक्ष एवं ग्राम प्रधान संदीप कुमार ने कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी सर्व समाज का सहयोग मिल रहा है, जिससे मेले की व्यवस्था बेहतर ढंग से संचालित की जा रही है।
मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानों, झूलों और खान-पान के स्टॉलों ने लोगों का आकर्षण बढ़ाया है। हालांकि गैस की किल्लत के कारण चाट, पकौड़ी और चाय के कुछ स्टॉल प्रभावित दिखाई दिए, जिससे व्यापारियों को थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद अन्य दुकानों पर अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली।
उद्घाटन कार्यक्रम में अमरीश गुप्ता, मनीष अग्रवाल, दिनेश राणा, जयपाल राणा, प्रेम सिंह राणा, धीर सिंह राणा, सोनू, जोगिंदर, राजकुमार राणा, मदन बागल, संजीव कुमार, रिशु भारद्वाज सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
मेले के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है और मंदिर परिसर में भक्त मां काली के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ा यह मेला न केवल क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखे हुए है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का भी महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है।
प्रशासन और मेला समिति के संयुक्त प्रयासों से यह आयोजन सुचारु रूप से संचालित हो रहा है और आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।








