विश्व रंगमंच दिवस पर सहारनपुर में व्यापार मंडल की बैठक, शीतल टण्डन बोले – जीवन स्वयं एक रंगमंच

सहारनपुर में विश्व रंगमंच दिवस पर व्यापार मंडल की बैठक आयोजित हुई। शीतल टण्डन ने रंगमंच को समाज का दर्पण बताते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डाला।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर । विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर सहारनपुर में उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल की जिला इकाई द्वारा एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया जिसमें रंगमंच की भूमिका, उसके सामाजिक महत्व और सांस्कृतिक योगदान पर विस्तृत चर्चा की गई कार्यक्रम रेलवे रोड स्थित जिला मुख्यालय कार्यालय पर आयोजित हुआ जहां बड़ी संख्या में व्यापारी, कला प्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष एवं कला प्रेमी शीतल टण्डन ने रंगमंच के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्व रंगमंच दिवस की स्थापना वर्ष 1961 में अंतरराष्ट्रीय थिएटर संस्थान द्वारा की गई थी और तब से यह दिवस पूरे विश्व में उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है

उन्होंने कहा कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है बल्कि यह समाज को दिशा देने और जागरूक करने का एक सशक्त माध्यम भी है रंगमंच के माध्यम से सामाजिक समस्याओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है और लोगों को सोचने के लिए प्रेरित किया जा सकता है

शीतल टण्डन ने महान नाटककार William Shakespeare के प्रसिद्ध कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि “जीवन स्वयं एक रंगमंच है” और प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में एक कलाकार की भूमिका निभाता है उन्होंने कहा कि यदि इस विचार को अपनाया जाए तो व्यक्ति अपने जीवन को बेहतर तरीके से समझ सकता है और समाज में सकारात्मक योगदान दे सकता है

उन्होंने भारतीय रंगमंच की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में कई महान कलाकारों ने रंगमंच को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है इस दौरान उन्होंने प्रसिद्ध अभिनेता Raj Kapoor के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई और रंगमंच को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई

साथ ही उन्होंने Prithvi Theatre का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्थान भारतीय रंगमंच के विकास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है जहां से अनेक प्रतिभाशाली कलाकारों ने अपनी कला को निखारा और देश-विदेश में पहचान बनाई

बैठक में अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि रंगमंच समाज का दर्पण होता है यह समाज में घटित हो रही घटनाओं को सजीव रूप में प्रस्तुत करता है जिससे लोगों को वास्तविकता से रूबरू होने का अवसर मिलता है

वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि आज के आधुनिक दौर में जहां डिजिटल माध्यमों का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है वहां रंगमंच की परंपरा को जीवित रखना और उसे आगे बढ़ाना बेहद आवश्यक है इसके लिए नए कलाकारों को मंच प्रदान करना और उनकी प्रतिभा को निखारने के लिए अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है

कार्यक्रम के दौरान रंगकर्मियों के योगदान को सराहा गया और उनके प्रति आभार व्यक्त किया गया वक्ताओं ने कहा कि रंगमंच की जीवंतता कलाकारों की मेहनत, समर्पण और जुनून का परिणाम है

इस अवसर पर जिला महामंत्री रमेश अरोड़ा, जिला कोषाध्यक्ष कर्नल संजय मिड्ढा, मुरली खन्ना, मेजर एस के सूरी, जावेद खान सरोहा, के के गर्ग, रवि कर्णवाल, योगेश पंवार, संदीप शर्मा, राकेश शर्मा, शुभम शर्मा और विक्रांत कुमार सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे

कार्यक्रम के अंत में रंगमंच की महत्ता को रेखांकित करते हुए इसे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनाने का संकल्प लिया गया साथ ही यह भी तय किया गया कि भविष्य में इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन नियमित रूप से किया जाएगा ताकि नई पीढ़ी को रंगमंच से जोड़ा जा सके

अंततः यह कहा जा सकता है कि विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर आयोजित यह बैठक न केवल सांस्कृतिक जागरूकता का संदेश देने में सफल रही बल्कि इसने समाज में रंगमंच की उपयोगिता और उसके महत्व को भी पुनः स्थापित किया है

trfgcvkj.blkjhgfd

Leave a Comment

और पढ़ें

Horoscope

Weather

और पढ़ें
error: Content is protected !!

राज्य