शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। आगामी 30 मार्च, सोमवार को महावीर जयंती के पावन अवसर पर महानगर क्षेत्र में मांस, मछली और मुर्गा बिक्री से संबंधित सभी दुकानों एवं पशुवधशालाओं को पूर्ण रूप से बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं। प्रशासन द्वारा यह निर्णय धार्मिक आस्था और परंपराओं के सम्मान को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
नगर निगम प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, इस दिन किसी भी प्रकार के पशु वध पर पूर्णतः प्रतिबंध रहेगा। साथ ही होटल, ढाबा और भोजनालयों में भी मांसाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाई गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का सख्ती से पालन कराया जाएगा और किसी भी प्रकार की लापरवाही या उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा।
नगर निगम के पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी डॉ. संदीप मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि यह आदेश प्रदेश शासन के निर्देशों के अनुरूप जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्म कल्याणक के अवसर पर अहिंसा के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए यह प्रतिबंध लागू किया गया है। यह दिन जैन समाज के लिए विशेष महत्व रखता है और इस अवसर पर जीव हत्या से बचने का संदेश दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि महानगर सीमा के अंतर्गत आने वाली सभी मीट की दुकानों, मछली विक्रेताओं, पोल्ट्री शॉप्स और पशुवधशालाओं को पूरी तरह से बंद रखने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए हैं। इसके साथ ही निरीक्षण टीमों का गठन भी किया गया है, जो विभिन्न क्षेत्रों में जाकर आदेश के अनुपालन की निगरानी करेंगी।
डॉ. मिश्रा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई भी दुकान या प्रतिष्ठान इस आदेश का उल्लंघन करते हुए खुला पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें जुर्माना, लाइसेंस निरस्तीकरण और अन्य दंडात्मक कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
प्रशासन ने शहरवासियों से भी अपील की है कि वे इस दिन धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए नियमों का पालन करें और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि की सूचना तत्काल संबंधित अधिकारियों को दें। साथ ही व्यापारियों से सहयोग की अपेक्षा जताते हुए कहा गया है कि वे स्वेच्छा से अपनी दुकानें बंद रखें और प्रशासन का साथ दें।
महावीर जयंती के अवसर पर शहर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों और शोभायात्राओं का आयोजन भी किया जाएगा, जिसके चलते कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहेगा। सुरक्षा के मद्देनजर संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा।
यह निर्णय न केवल धार्मिक परंपराओं के सम्मान का प्रतीक है, बल्कि समाज में आपसी सद्भाव और शांति बनाए रखने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।








