फैय्याज अली आब्दी
ननौता। नगर पंचायत ननौता द्वारा स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयास अब जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं। नगर में स्थापित मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी यानी एमआरएफ सेंटर न केवल कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण में अहम भूमिका निभा रहा है, बल्कि यह नगर पंचायत के लिए आय का एक प्रभावी और स्थायी स्रोत भी बनता जा रहा है।
हाल ही में एमआरएफ सेंटर पर एकत्रित किए गए सूखे कचरे—जैसे प्लास्टिक, कागज, गत्ता और लोहे आदि—का सफलतापूर्वक पृथक्करण कर अधिकृत एजेंसियों को विक्रय किया गया। इस प्रक्रिया के माध्यम से नगर पंचायत को 26,505 रुपये की आय प्राप्त हुई। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि कम समय के भीतर यह दूसरी बार कचरे का विक्रय किया गया है, जो केंद्र की कार्यप्रणाली की निरंतरता और प्रभावशीलता को दर्शाता है।
नगर पंचायत प्रशासन का कहना है कि यह सफलता केवल एक आर्थिक उपलब्धि नहीं, बल्कि स्वच्छता व्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एमआरएफ सेंटर के माध्यम से अब कचरे को बोझ नहीं, बल्कि संसाधन के रूप में देखा जा रहा है।
इस पूरे कार्य को नगर पंचायत अध्यक्ष रूमाना अफजाल खान और अधिशासी अधिकारी कमलाकांत राजवंशी के मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया। उनके नेतृत्व में कचरे का व्यवस्थित वर्गीकरण कर उसे पुनर्चक्रण योग्य बनाया गया और अधिकृत रीसाइक्लिंग एजेंसियों को सौंपा गया। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला, बल्कि नगर पंचायत की आय में भी इजाफा हुआ।
एमआरएफ सेंटर के संचालन की जिम्मेदारी परियोजना प्रबंधक गौतम चौहान के पास है। उनके प्रयासों से केंद्र की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित और परिणामोन्मुख बनाया गया है। नियमित रूप से कचरे का संग्रह, छंटाई और सुरक्षित भंडारण कर उसे पुनर्चक्रण के लिए भेजा जा रहा है, जिससे सेंटर की कार्यक्षमता लगातार बढ़ रही है।
अधिशासी अधिकारी कमलाकांत राजवंशी ने बताया कि एमआरएफ सेंटर का उद्देश्य केवल कचरे का निस्तारण करना नहीं है, बल्कि इसे एक संसाधन में बदलना भी है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से प्राप्त होने वाली अतिरिक्त आय को नगर की स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने में लगाया जाएगा। इससे नगर में साफ-सफाई के स्तर को बेहतर किया जा सकेगा और नागरिकों को स्वच्छ वातावरण मिल सकेगा।
नगर पंचायत ननौता का लक्ष्य स्वच्छ भारत मिशन के तहत एक स्वच्छ, सुंदर और कचरा मुक्त नगर का निर्माण करना है। इसके लिए प्रशासन लगातार प्रयासरत है और नागरिकों को भी इस अभियान से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
नगर पंचायत प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे अपने घरों और प्रतिष्ठानों में गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्रित करें। ऐसा करने से एमआरएफ सेंटर की कार्यक्षमता और बढ़ेगी तथा कचरे के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी। साथ ही यह कदम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण योगदान साबित होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी प्रकार की पहल अन्य नगर निकायों में भी अपनाई जाए तो न केवल कचरा प्रबंधन की समस्या काफी हद तक हल हो सकती है, बल्कि नगर निकायों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो सकती है। ननौता का यह मॉडल आने वाले समय में अन्य क्षेत्रों के लिए प्रेरणा बन सकता है।
इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि यदि योजनाओं को सही तरीके से लागू किया जाए और उनमें जनभागीदारी सुनिश्चित की जाए, तो स्वच्छता के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी प्राप्त किया जा सकता है।








