रुतबा बैंक्वेट हॉल विवाद गहराया: उद्घाटन में सामने आया असली स्वामी, कागजों में कोई और नाम

सहारनपुर के रुतबा बैंक्वेट हॉल को लेकर नया खुलासा—उद्घाटन के समय सामने आया असली स्वामी, जबकि कागजों में मालिक कोई और। अवैध संचालन और प्रशासनिक ढिलाई पर उठे गंभीर सवाल।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। अंबाला रोड स्थित रुतबा बैंक्वेट हॉल का मामला अब और अधिक विवादों में घिरता जा रहा है। पहले जहां इस बैंक्वेट हॉल के बिना अनुमति संचालन और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर सवाल उठ रहे थे, वहीं अब इसके स्वामित्व को लेकर भी चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, जब इस बैंक्वेट हॉल का उद्घाटन (मुहूर्त) हुआ था, उस दौरान स्थानीय महापौर और विधायक की मौजूदगी में फीता काटा गया था। उस समय जो व्यक्ति इस बैंक्वेट हॉल का स्वामी बताया गया और जिसने फीता कटवाया, वही वास्तविक स्वामी के रूप में सामने आया था। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के अनुसार, उद्घाटन के दौरान उसी व्यक्ति की भूमिका प्रमुख रही और उसे ही संचालक व मालिक के तौर पर प्रस्तुत किया गया।
हालांकि, वर्तमान में कागजी रिकॉर्ड में इस बैंक्वेट हॉल का स्वामी रईस अहमद दर्शाया जा रहा है। यह अंतर अब कई सवाल खड़े कर रहा है कि आखिर वास्तविक मालिक कौन है और कागजों में नाम किसी अन्य व्यक्ति का क्यों दर्ज किया गया है।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि असली स्वामी अब सामने नहीं आ रहा है और अपना चेहरा छुपाकर किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर बैंक्वेट हॉल का संचालन करवा रहा है। यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि धनबल और प्रभाव के दम पर पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई प्रभावित हो रही है।
गौरतलब है कि सहारनपुर विकास प्राधिकरण द्वारा इस बैंक्वेट हॉल को नियमों के उल्लंघन के चलते सील किया गया था। बाद में एक शादी समारोह के चलते मानवीय आधार पर दो दिनों के लिए सील हटाई गई थी, लेकिन इसके बाद भी लगातार इसका संचालन जारी है।
इतना ही नहीं, अग्निशमन विभाग द्वारा भी इस बैंक्वेट हॉल को असुरक्षित बताया जा चुका है और स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यहां किसी भी प्रकार के आयोजन नहीं होने चाहिए। इसके बावजूद भी कार्यक्रम आयोजित होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
अब इस पूरे मामले में दो प्रमुख सवाल सामने हैं—पहला, बिना वैध अनुमति के बैंक्वेट हॉल आखिर किसके संरक्षण में संचालित हो रहा है? और दूसरा, जब उद्घाटन के समय एक व्यक्ति स्वामी के रूप में सामने आया था, तो अब कागजों में किसी अन्य का नाम क्यों दर्ज है?
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
फिलहाल, रुतबा बैंक्वेट हॉल का मामला सहारनपुर में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

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