सहारनपुर में रेलवे मजदूर यूनियन का प्रदर्शन, निजीकरण और मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार विरोध

सहारनपुर में रेलवे मजदूर यूनियन ने निजीकरण और मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने OPS बहाली, रिक्त पद भरने और भत्तों के भुगतान की मांग उठाई।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। उत्तरीय रेलवे मजदूर यूनियन के आह्वान पर 9 अप्रैल 2026 को पीडब्ल्यूआई कार्यालय में रेलवे कर्मचारियों ने मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने एकजुट होकर सरकार की नीतियों के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त किया और अपनी मांगों को बुलंद किया।

यह प्रदर्शन यूनियन के राष्ट्रीय महामंत्री बी.सी. शर्मा (नई दिल्ली) एवं मंडल मंत्री मनमीत सिंह (अंबाला मंडल) के आह्वान पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व करते हुए मंडल संगठन मंत्री अजय बिरला ने कहा कि वर्तमान समय में सरकारी तंत्र रेलवे के विभिन्न कार्यों का तेजी से निजीकरण कर रहा है, जो कर्मचारियों के हितों के विपरीत है।

उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे के नियमित कार्य जैसे ट्रैक सिग्नलिंग, इंजन व कोच रिपेयर, वातानुकूलित कोच मेंटेनेंस, टिकट बुकिंग और आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य ठेकेदारों को सौंपे जा रहे हैं। इससे न केवल कर्मचारियों के अधिकारों का हनन हो रहा है, बल्कि रेलवे की कार्यप्रणाली पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने और नई पेंशन योजना (NPS/UPS) को समाप्त करने की मांग जोर-शोर से उठाई। साथ ही कोरोना काल के दौरान फ्रीज की गई महंगाई भत्ते की तीन किस्तों के भुगतान की मांग भी प्रमुख रूप से की गई।

यूनियन नेताओं ने कहा कि रेलवे में रिक्त पदों को भरने के बजाय ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो कर्मचारियों के भविष्य के लिए चिंताजनक है। उन्होंने मांग की कि सभी रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए और बढ़ते कार्यभार के अनुसार नए पदों का सृजन किया जाए।

इसके अतिरिक्त कर्मचारियों ने आठवें वेतन आयोग में उचित फिटमेंट फैक्टर लागू करने, न्यूनतम और अधिकतम वेतनमान के अंतर को कम करने तथा लंबित पदोन्नति और अपग्रेडिंग को शीघ्र लागू करने की मांग रखी।

यूनियन ने यह भी मांग की कि रेलवे में अप्रेंटिस कर चुके युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए और ‘लार्जर स्कीम’ को पुनः लागू किया जाए। तकनीकी एवं अन्य श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए वर्दी भत्ता 10,000 रुपये करने तथा लंबित रिस्क भत्ते का भुगतान शीघ्र करने की मांग भी उठाई गई।

रेलवे आवासों की जर्जर स्थिति को लेकर भी कर्मचारियों ने चिंता जताई और इसमें शीघ्र सुधार की मांग की। प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

इस दौरान राजन वत्स, रामप्रीत, बाबूराम, उपेन्द्र गुप्ता, संजय कुमार, रोहतास कटारिया, राजेन्द्र सिंह, जितेंद्र, विवेक कुमार सहित अनेक कर्मचारी मौजूद रहे।

कुल मिलाकर यह प्रदर्शन रेलवे कर्मचारियों की बढ़ती असंतुष्टि और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए चल रहे संघर्ष का प्रतीक रहा। यूनियन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि मजदूर हितों की अनदेखी जारी रही, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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