शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर उ.प्र. उद्योग व्यापार मंडल की जिला इकाई द्वारा रेलवे रोड स्थित स्थान पर एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें पुस्तकों के महत्व और उनके सामाजिक योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम के उपरांत जिलाध्यक्ष शीतल टण्डन एवं जिला कोषाध्यक्ष कर्नल संजय मिड्ढा ने मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार को उनके कैंप कार्यालय में पुस्तकें भेंट कर विश्व पुस्तक दिवस की शुभकामनाएं दीं।
“पुस्तकें हैं सच्ची मित्र”
बैठक को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष शीतल टण्डन ने कहा कि पुस्तकें मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र होती हैं, जो न केवल ज्ञान प्रदान करती हैं बल्कि जीवन में मार्गदर्शन और परामर्श भी देती हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तकें व्यक्ति के मानसिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, नैतिक और व्यावसायिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने बताया कि किसी भी देश की सभ्यता, संस्कृति और इतिहास के संरक्षण व प्रचार-प्रसार में पुस्तकों का अहम योगदान रहा है। वैदिक साहित्य से लेकर आधुनिक ज्ञान-विज्ञान तक, हर युग की जानकारी पुस्तकों के माध्यम से ही संरक्षित है।
विश्व स्तर पर मान्यता
शीतल टण्डन ने जानकारी देते हुए बताया कि यूनेस्को द्वारा 23 अप्रैल 1995 से विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस मनाने की शुरुआत की गई थी। यह दिन महान साहित्यकार विलियम शेक्सपीयर की स्मृति में भी मनाया जाता है, जिनका जन्म और निधन दोनों इसी तिथि को हुआ था।
डिजिटल युग में भी पुस्तकों का महत्व बरकरार
उन्होंने कहा कि आज इंटरनेट के बढ़ते उपयोग के कारण पुस्तकों के डिजिटल संस्करण भी उपलब्ध हो गए हैं, लेकिन इसके बावजूद पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है। विज्ञान, इतिहास, तकनीक, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और साहित्य जैसे हर क्षेत्र में पुस्तकें ज्ञान का प्रमुख स्रोत बनी हुई हैं।
‘अनमोल वचन’ पुस्तक का वितरण
इस अवसर पर शीतल टण्डन द्वारा संकलित पुस्तक ‘महापुरुषों के अनमोल वचन’ भी उपस्थित सदस्यों को भेंट की गई, जिसे सभी ने सराहा।
उपस्थित रहे व्यापारी प्रतिनिधि
कार्यक्रम में जिला महामंत्री रमेश अरोड़ा, कोषाध्यक्ष कर्नल संजय मिड्ढा, पवन कुमार गोयल, मेजर एस.के. सूरी, रमेश डाबर, राजीव अग्रवाल, संजय महेश्वरी, संजीव सचदेवा, मुरली खन्ना, भोपाल सिंह सैनी, संदीप सिंघल, सतीश ठकराल, अभिषेक भाटिया, अशोक मलिक सहित बड़ी संख्या में व्यापारी प्रतिनिधि उपस्थित रह ।
विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि आधुनिक डिजिटल युग में भी पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है। ज्ञान, संस्कृति और सभ्यता के संरक्षण में पुस्तकों की भूमिका आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी सदियों पहले थी।








