शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। नगर निगम क्षेत्र में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़े कार्यों के लिए बनाए गए जोनल सिस्टम को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पुराने शहर से लगभग 4 किलोमीटर दूर जोनल कार्यालय शिफ्ट किए जाने से आम जनता को हो रही परेशानी अब जनप्रतिनिधियों के विरोध का कारण बन गई है। लगातार तीसरी बार पार्षदों के प्रतिनिधिमंडल ने इस मुद्दे को लेकर मेयर और नगर आयुक्त से मुलाकात कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
पार्षद एवं कार्यकारिणी सदस्य मंसूर बदर के नेतृत्व में पार्षद दल ने नगर निगम प्रशासन के इस फैसले को आमजन के लिए असुविधाजनक बताया। उन्होंने कहा कि बिना जमीनी हकीकत समझे जोनल व्यवस्था लागू करने से नागरिकों को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ रही है।

तीन जोनों में बांटा गया शहर, लेकिन बढ़ी मुश्किलें
नगर निगम द्वारा जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और हाउस टैक्स से संबंधित कार्यों के लिए शहर को तीन प्रमुख जोनों—मनोहरपुर, हकीकत नगर और नुमाइश कैंप—में विभाजित किया गया है। लेकिन इस व्यवस्था में पुराने शहर के कई वार्डों को दूरस्थ जोन से जोड़ दिया गया, जिससे लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
प्रभावित वार्डों में 28, 31, 32, 43, 49, 57, 58, 62, 63, 64, 65, 66, 68, 69 और 70 शामिल हैं। इन क्षेत्रों के लोगों को अब अपने जरूरी दस्तावेज बनवाने के लिए 4 किलोमीटर तक का सफर तय करना पड़ रहा है।
महिलाओं और आम नागरिकों को हो रही सबसे ज्यादा परेशानी
पार्षदों ने बताया कि वर्तमान समय में स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया चल रही है, जिसमें जन्म प्रमाण पत्र की आवश्यकता अनिवार्य होती है। ऐसे में दूर स्थित कार्यालय तक पहुंचना विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों के लिए बेहद कठिन हो गया है।
घंटाघर, कोर्ट रोड और कचहरी क्षेत्र की भारी ट्रैफिक के बीच से गुजरना आम नागरिकों के लिए चुनौती बन गया है। कई लोगों को एक छोटे से काम के लिए पूरे दिन का समय खर्च करना पड़ रहा है।
पार्षदों की मांग: नगर निगम में ही बने सिटी जोन
मंसूर बदर ने स्पष्ट रूप से मांग रखी कि पुराने शहर के इन वार्डों के लिए नगर निगम परिसर में ही एक अलग “सिटी जोन” बनाया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रशासन को जनहित को प्राथमिकता देते हुए तत्काल इस समस्या का समाधान करना चाहिए।
प्रशासन ने दिया तीन दिन में समाधान का आश्वासन
पार्षदों के बढ़ते दबाव और लगातार विरोध को देखते हुए मेयर डॉ. अजय कुमार सिंह और नगर आयुक्त शिपू गिरि ने मामले को गंभीरता से लिया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जीपीएस और क्षेत्रीय स्थिति का आकलन कर संबंधित वार्डों को निगम कार्यालय के नजदीक समायोजित किया जाएगा।
प्रशासन ने तीन दिन के भीतर सिटी जोन बनाने की दिशा में कार्रवाई शुरू करने का भरोसा भी दिया है, जिससे आम नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
आंदोलन की चेतावनी
पार्षदों ने साफ कहा कि यदि तय समय में समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा सीधे जनता की सुविधा से जुड़ा है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस दौरान पार्षद समीर अंसारी, सईद सिद्दीकी, इज़हार मंसूरी, महमूद हसन, रईस पप्पू, जफर अंसारी, मेनपाल, आसिफ अंसारी, गुलज़ेब खान, डॉ. मंसूर और एडवोकेट जावेद सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया को सरल बनाने के बजाय जटिल बनाना प्रशासन के लिए चुनौती बनता जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन अपने आश्वासन पर कितना खरा उतरता है और आम जनता को कब तक राहत मिलती है।







