शहरी चौपाल ब्यूरो
नई दिल्ली। मध्य पूर्व क्षेत्र में जारी युद्ध और समुद्री मार्गों पर बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है। इसी बीच देश में रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद यह आशंका जताई जा रही थी कि पेट्रोल और डीजल के दाम भी बढ़ सकते हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने इस पर स्पष्ट करते हुए कहा है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी।

सरकार के अनुसार देश में तेल कंपनियों के पास पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे बढ़ती मांग को आसानी से पूरा किया जा सकता है। इसके साथ ही घरेलू बाजार में रसोई गैस की कमी न होने पाए, इसके लिए सरकार ने आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करते हुए देश की तेल रिफाइनरियों को अपनी क्षमता बढ़ाकर एलपीजी गैस का उत्पादन तेज करने के निर्देश दिए हैं, ताकि आपूर्ति लगातार बनी रहे।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण समुद्री मार्गों से तेल की आवाजाही प्रभावित हुई है, लेकिन भारत ने पहले से ही संभावित संकट को देखते हुए पर्याप्त तैयारी कर रखी है। इसी कारण देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर फिलहाल किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा।

सरकार ने यह भी बताया कि देश की प्रमुख तेल कंपनियां इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन , भारत पैट्रोलियम कॉरपोरेशन , हिंदुस्तान पैट्रोलियम कॉरपोरेशन ,—ने इस वर्ष की शुरुआत में अच्छा मुनाफा कमाया है। इन कंपनियों के पास ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए पर्याप्त वित्तीय क्षमता मौजूद है, जिससे वे कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का संतुलन बना सकती हैं।
केंद्र सरकार के अनुसार वर्ष 2022 से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं। तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में होने वाले उतार-चढ़ाव के अनुसार अपने मुनाफे और नुकसान का संतुलन बनाए रखती हैं, ताकि आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
सरकार का कहना है कि मौजूदा हालातों पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति सुचारु रूप से जारी रखने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।








