शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। सर्किट हाउस रोड के चौड़ीकरण के दौरान “अतिक्रमण” बताकर मकानों को तोड़े जाने का मामला अब बड़ा कानूनी रूप ले चुका है। भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट ने इस प्रकरण को गंभीर मानते हुए महापौर, नगर आयुक्त, एसडीएम समेत आठ अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक तंत्र में हलचल तेज हो गई है।
हसनपुर निवासी शमशेर सिंह गौतम द्वारा दायर वाद में आरोप लगाया गया है कि चौड़ीकरण के नाम पर नियमों की अनदेखी करते हुए लोगों के मकानों को नुकसान पहुंचाया गया। याचिका में महापौर डॉ. अजय कुमार, नगर आयुक्त शिपू गिरि, विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष सूरज पटेल, एसडीएम सदर सुबोध कुमार समेत कुल आठ अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।
वादी के अनुसार शुगर मिल से हसनपुर रोड तक बहने वाला रजबहा सिंचाई विभाग के स्वामित्व में है, जिसकी कुल चौड़ाई 55 फीट है। विभागीय रिकॉर्ड और आरटीआई से मिली जानकारी में भी यही तथ्य सामने आया है। इसके बावजूद संबंधित विभागों ने तय समय सीमा से पहले ही कार्रवाई करते हुए एक अप्रैल को जेसीबी मशीनों से मकानों के आगे के हिस्से तोड़ दिए, जबकि अतिक्रमण हटाने की अंतिम तिथि चार अप्रैल निर्धारित थी।
इस कार्रवाई से प्रभावित लोगों को भारी नुकसान हुआ और मामला न्यायालय तक पहुंच गया। पीड़ितों ने पहले हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां पुनर्वास की व्यवस्था करने और मौके पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे। आरोप है कि इन आदेशों का भी पालन नहीं किया गया।
अब भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट ने मामले को संज्ञान में लेते हुए सभी संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिवों से भी विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है।
इस घटनाक्रम के बाद सहारनपुर में सियासी और प्रशासनिक माहौल गर्म हो गया है। लोगों में कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं अब सभी की नजर कोर्ट की अगली सुनवाई और प्रशासन के जवाब पर टिकी हुई है।

नगर निगम महापौर का वर्जन:
सहारनपुर नगर निगम के महापौर डॉ. अजय सिंह ने सर्किट हाउस रोड पर हुई तोड़फोड़ की कार्रवाई से निगम का कोई संबंध होने से साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा कि सर्किट हाउस रोड सिंचाई विभाग की भूमि पर स्थित है और वहां की गई कार्रवाई प्रशासन द्वारा की गई है। नगर निगम की ओर से न तो कोई टीम मौके पर भेजी गई और न ही किसी प्रकार की तोड़फोड़ की कार्रवाई में निगम की भागीदारी रही। महापौर ने कहा कि उनके सहित नगर निगम के अधिकारियों को जो नोटिस जारी किए गए हैं, वे पूरी तरह निराधार और गलत हैं।







