दुनिया भर में भारत की मजबूत पकड़ व विपक्ष की नज़र में विदेश नीति 

 

लेखक : राव सालिम वरिष्ठ पत्रकार 

भारत आज दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन चुका है। इतनी बड़ी जनसंख्या के बावजूद भारत वैश्विक मंच पर तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। आर्थिक विकास, तकनीक और कूटनीति के क्षेत्र में भारत लगातार आगे बढ़ रहा है। दुनिया के कई बड़े देश भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखते हैं। एशिया ही नहीं बल्कि यूरोप, अमेरिका और मध्य-पूर्व के देशों के साथ भी भारत के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति को अधिक सक्रिय और प्रभावशाली माना जा रहा है। भारत ने अमेरिका, रूस, फ्रांस, जापान और खाड़ी देशों के साथ अपने रिश्तों को मजबूत किया है। इसके साथ ही वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका भी बढ़ी है। जी-20 की अध्यक्षता से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मध्यस्थता तक, भारत को एक जिम्मेदार और उभरती ताकत के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि मोदी सरकार की विदेश नीति को लेकर विपक्ष की ओर से कई सवाल भी उठाए जाते रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि कुछ पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में उतार-चढ़ाव आया है और विदेश नीति को लेकर सरकार को अधिक संतुलन और पारदर्शिता दिखानी चाहिए। फिर भी सरकार का दावा है कि भारत की कूटनीति देश के हितों को प्राथमिकता देते हुए वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को मजबूत कर रही है।

ईरान युद्ध पर भारत की चुप्पी और बढ़ती महंगाई पर उठते सवाल

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालात पर भारत की अपेक्षाकृत शांत प्रतिक्रिया को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष का मानना है कि एक बड़े लोकतांत्रिक देश और उभरती वैश्विक शक्ति होने के नाते भारत को अंतरराष्ट्रीय संकटों पर अधिक स्पष्ट और संतुलित रुख अपनाना चाहिए। विपक्षी दलों का कहना है कि विदेश नीति में पारदर्शिता और स्पष्टता जरूरी है, ताकि देश की जनता को यह समझ में आए कि सरकार वैश्विक घटनाओं को किस नजरिए से देख रही है और उसका भारत के हितों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।

दूसरी ओर सरकार का पक्ष यह रहा है कि विदेश नीति में कई बार संतुलन और कूटनीतिक संयम जरूरी होता है। भारत के ईरान, खाड़ी देशों, अमेरिका और अन्य वैश्विक शक्तियों के साथ अलग-अलग प्रकार के रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं। ऐसे में किसी भी विवादित मुद्दे पर जल्दबाजी में बयान देने के बजाय स्थिति का सावधानी से आकलन करना और देश के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखना आवश्यक माना जाता है। सरकार का दावा है कि उसकी प्राथमिकता भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक हित और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखना है।

हालांकि देश के भीतर आर्थिक मोर्चे पर भी चिंताएं सामने आ रही हैं। कई रिपोर्टों और आंकड़ों के आधार पर विपक्ष यह आरोप लगाता रहा है कि महंगाई और गरीबी आम लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के दाम बढ़ने से मध्यम और गरीब वर्ग पर दबाव बढ़ता है। ऐसे में विपक्ष सरकार से मांग करता है कि वह महंगाई पर नियंत्रण और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए अधिक ठोस कदम उठाए। कुल मिलाकर, विदेश नीति और आर्थिक हालात दोनों ही मुद्दे वर्तमान समय में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं।

trfgcvkj.blkjhgfd

Leave a Comment

और पढ़ें

Horoscope

Weather

और पढ़ें
error: Content is protected !!

राज्य