शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। संयुक्त पेंशनर्स कल्याण समिति उत्तर प्रदेश के आह्वान पर जनपद के पेंशनभोगियों ने केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) वैधता अधिनियम-2025 के विरोध में काला दिवस मनाते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। हकीकत नगर स्थित रामलीला मैदान में आयोजित इस धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पेंशनभोगी शामिल हुए और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अधिनियम को वापस लेने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान पेंशनभोगियों ने काली टोपी और काली पट्टी बांधकर अपना विरोध जताया। वक्ताओं ने कहा कि यह अधिनियम पेंशनभोगियों के बीच सेवानिवृत्ति तिथि के आधार पर वर्गीकरण करता है, जो संविधान के अनुच्छेद-14 के तहत समानता के अधिकार के विरुद्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून के माध्यम से पेंशनभोगियों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है।
सभा को संबोधित करते हुए जनपद सचिव शिवराज सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार के वेतन और पेंशन संबंधी फैसलों का प्रभाव सीधे तौर पर राज्यों के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि अधिनियम को भूतलक्षी प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट) से लागू करना पूरी तरह अनुचित है, जिससे पहले से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
वक्ताओं ने 3 नवंबर 2025 को गठित 8वें वेतन आयोग में पेंशनभोगियों की अनदेखी पर भी नाराजगी जताई और इसे उनके साथ अन्याय बताया। उन्होंने मांग की कि पेंशनभोगियों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस अधिनियम को तत्काल वापस लिया जाए और उन्हें न्याय दिलाया जाए।
धरना-प्रदर्शन के बाद पेंशनभोगियों ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा, जिसमें अधिनियम की समीक्षा कर इसे निरस्त करने की मांग की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जनेश्वर प्रसाद ने की, जबकि संचालन राजेश्वर प्रसाद, सेवा राम, मो. आफताफ, रामलाल सिंह, डॉ. अमर सिंह, भोपाल सिंह, ज्योति प्रसाद, गजा सिंह, सुंदर कुमार, रामकुमार, सुच्चा सिंह, नेत्रपाल, डॉ. नेत्रपाल, गोवर्धन यादव, आरसी शर्मा, देशपाल सिंह, राजकुमार, नरेश सैनी, ज्ञान सिंह सहित अन्य लोगों ने किया। इस दौरान विभिन्न संगठनों से जुड़े पेंशनभोगियों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।








