शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों के बीच सहारनपुर पुलिस ने एक सराहनीय सफलता हासिल करते हुए पीड़िता को बड़ी राहत प्रदान की है। Saharanpur Police के थाना साइबर क्राइम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर फ्रॉड के जरिए ठगी गई 5 लाख 37 हजार रुपये की पूरी धनराशि पीड़िता के खाते में वापस करा दी है। इस सफलता के बाद पुलिस की कार्यशैली की व्यापक सराहना हो रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 26 फरवरी 2026 को श्रीमती नीलिमा शर्मा, निवासी सुक्खुपुरा, बेरीबाग, थाना जनकपुरी, जनपद सहारनपुर ने थाना साइबर क्राइम में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा उनके बैंक खाते से यूपीआई के माध्यम से ऑनलाइन धोखाधड़ी करते हुए 5,37,000 रुपये की बड़ी रकम निकाल ली गई।
पीड़िता के अनुसार यह पूरा मामला बेहद तेजी से हुआ और उन्हें इसका पता तब चला जब उनके खाते से पैसे कटने के संदेश आने लगे। इस घटना के बाद पीड़िता काफी घबराई हुई थी और तुरंत पुलिस से संपर्क कर न्याय की गुहार लगाई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सहारनपुर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में साइबर अपराधों की रोकथाम और पीड़ितों को राहत दिलाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान के तहत इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर लिया गया।
पुलिस अधीक्षक नगर और साइबर अपराध के नोडल अधिकारी तथा क्षेत्राधिकारी साइबर क्राइम के पर्यवेक्षण में थाना साइबर क्राइम की टीम ने प्रभारी निरीक्षक इन्द्रेश सिंह के नेतृत्व में तकनीकी जांच शुरू की। टीम ने सबसे पहले लेनदेन की पूरी डिटेल खंगाली और यह पता लगाया कि पैसे किन खातों में ट्रांसफर किए गए हैं।
साइबर टीम ने तत्परता दिखाते हुए संबंधित बैंकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से संपर्क किया और समय रहते उन खातों को फ्रीज कराने की कार्रवाई की, जिनमें यह राशि ट्रांसफर की गई थी। इसी त्वरित कार्रवाई के चलते पूरी धनराशि को सुरक्षित कर लिया गया।
लगातार प्रयासों और समन्वय के बाद अंततः पुलिस टीम ने 5,37,000 रुपये की पूरी राशि को रिकवर कर पीड़िता के खाते में वापस करा दिया। इस प्रकार पीड़िता को उसकी पूरी रकम वापस मिल गई, जो कि साइबर अपराध के मामलों में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
अपनी रकम वापस मिलने के बाद पीड़िता नीलिमा शर्मा ने सहारनपुर पुलिस और साइबर क्राइम टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पुलिस की तत्परता और गंभीरता के कारण ही उन्हें इतनी जल्दी न्याय मिल सका।
इस सफल कार्रवाई में थाना साइबर क्राइम की टीम के कई अधिकारियों और कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। टीम में प्रभारी निरीक्षक इन्द्रेश सिंह, हेड कांस्टेबल रोहित कुमार, नितिन शर्मा, निशांत तोमर, विजय सिंह तथा महिला हेड कांस्टेबल रुचि शर्मा शामिल रहीं। सभी ने मिलकर तकनीकी और कानूनी प्रक्रिया को तेजी से पूरा करते हुए इस मामले का सफल निस्तारण किया।
साइबर अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं आज के डिजिटल युग में तेजी से बढ़ रही हैं। यूपीआई और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ ही ठग नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता बेहद जरूरी हो गई है।
पुलिस प्रशासन ने भी इस घटना के बाद लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपने बैंकिंग संबंधी विवरण साझा न करें। खासकर ओटीपी, पिन, पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी किसी के साथ भी साझा करना बेहद खतरनाक हो सकता है।
इसके अलावा पुलिस ने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार का साइबर फ्रॉड होता है तो वह तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करे या फिर राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराए। समय रहते शिकायत दर्ज कराने से पैसे वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि साइबर अपराध के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि पीड़ित तुरंत कार्रवाई करता है तो ठगी गई रकम को ट्रैक कर उसे वापस लाना संभव हो जाता है।
इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय हो तो साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। सहारनपुर पुलिस की यह कार्रवाई न केवल एक पीड़िता को राहत देने वाली है, बल्कि यह अन्य लोगों के लिए भी एक प्रेरणा और जागरूकता का संदेश है।
अंततः यह कहा जा सकता है कि साइबर अपराध के इस मामले में सहारनपुर पुलिस की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई ने एक मिसाल पेश की है। यह घटना लोगों को सतर्क रहने और डिजिटल लेनदेन करते समय सावधानी बरतने का महत्वपूर्ण संदेश भी देती है।








