सहारनपुर नगर निगम का 752.76 करोड़ का बजट पास, बैठक में हंगामा और तीखी बहस

सहारनपुर नगर निगम की बजट बैठक में 752.76 करोड़ का बजट पारित हुआ। बैठक के दौरान पार्षदों और अधिकारियों के बीच हंगामा, आय-व्यय और निर्माण कार्यों को लेकर गंभीर सवाल उठे।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। नगर निगम सहारनपुर की वर्ष 2026-27 की बजट बैठक में 752 करोड़ 76 लाख 37 हजार रुपये का बजट सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया, लेकिन बैठक के दौरान कई मुद्दों को लेकर जबरदस्त हंगामा और तीखी बहस देखने को मिली। पार्षदों ने जहां अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए, वहीं आय-व्यय के आंकड़ों और विकास कार्यों की पारदर्शिता को लेकर भी गंभीर चिंताएं सामने रखीं।

बैठक के दौरान उस समय माहौल गर्म हो गया जब पार्षद रईस पप्पू ने निर्माण विभाग के एक अधिकारी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अधिकारी द्वारा “गोली मारो” जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया, जो न केवल अनुचित है बल्कि जनप्रतिनिधियों का अपमान भी है। इस मुद्दे पर कई पार्षद आक्रोशित हो गए और बैठक में शोर-शराबा शुरू हो गया। स्थिति को संभालने के लिए महापौर डॉ. अजय सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा, जिसके बाद मामला शांत हुआ।

बैठक में पार्षद एवं कार्यकारिणी सदस्य मंसूर बदर ने नगर निगम की वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए निगम की मूल आय 56 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी, लेकिन 27 मार्च तक केवल 29 करोड़ रुपये की ही वसूली हो सकी है। उन्होंने इसे चिंताजनक बताते हुए निगम से आय बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की।

मंसूर बदर ने विभिन्न मदों में अपेक्षा से कम आय पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि दुकान किराया और प्रीमियम किराया से 110 लाख रुपये के लक्ष्य के मुकाबले केवल 39 लाख रुपये की वसूली हुई है। इसी तरह लाइसेंस विभाग से मात्र 23 हजार रुपये, विज्ञापन से 55 हजार रुपये, होटल-लॉज और धर्मशालाओं से 7 लाख रुपये, स्कूल-कॉलेज बस लाइसेंस से 43 हजार रुपये और सड़क कटिंग से केवल 4 लाख रुपये की आय हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि शहर में लगातार सड़क कटिंग होने के बावजूद संबंधित विभागों से पर्याप्त शुल्क क्यों नहीं लिया जा रहा।

निर्माण कार्यों को लेकर भी बैठक में काफी बहस हुई। पार्षदों ने “दर के कार्यों” के नाम पर पूरी सड़कों के निर्माण को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठाए और पिछले तीन वर्षों के कार्यों की सूची उपलब्ध कराने की मांग की। गिल कॉलोनी के बाहर बन रहे नाले को लेकर भी शंकाएं व्यक्त की गईं, जिस पर महापौर ने तत्काल जांच के निर्देश दिए।

पथ प्रकाश व्यवस्था भी चर्चा का प्रमुख विषय रही। पार्षदों ने कहा कि लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद शहर के कई हिस्सों में अंधेरा बना हुआ है और सैकड़ों स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं। इसके अलावा जलकल विभाग द्वारा ट्यूबवेल संचालन का कार्य एक ऐसी कंपनी को दिए जाने पर भी आपत्ति जताई गई, जो अन्य शहरों में विवादों में रह चुकी है।

बैठक में अन्य पार्षदों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं प्रमुखता से उठाईं। पार्षद समीर अंसारी ने मानकमऊ क्षेत्र की समस्याओं, आसिफ अंसारी ने मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों के बजट, रईस पप्पू ने स्लॉटर हाउस संचालन, महमूद ने ट्यूबवेल स्थापना, रेशमा रूबी ने अरबी मदरसे, शहगुल ने साबरी बाग और शबाना परवीन ने तकिया वाली गली की समस्याओं को विस्तार से रखा।

अधिकारियों और पार्षदों के बीच कई मुद्दों पर विस्तृत चर्चा के बाद अंत में महापौर ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि पार्षदों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि नगर निगम का उद्देश्य शहर के विकास के साथ-साथ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है और इसके लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा।

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