सहारनपुर में व्यापार मंडल की समीक्षा बैठक, नीतियों और वैश्विक हालात पर भड़के व्यापारी

सहारनपुर में उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल की बैठक में व्यापारियों ने वैश्विक युद्ध, टैक्स नियमों, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और हाउस टैक्स वृद्धि को लेकर चिंता जताई।

 

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल की जिला इकाई द्वारा व्यापारिक वर्ष 2025-26 के समापन पर रेलवे रोड स्थित कार्यालय में वार्षिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में व्यापारी वर्ग ने वर्षभर सामने आई समस्याओं और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा करते हुए आगामी रणनीति तय की।

बैठक को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष शीतल टंडन ने कहा कि वर्ष 2025-26 व्यापारिक दृष्टि से मिला-जुला रहा। उन्होंने कहा कि ईरान–इजराइल संघर्ष और रूस–यूक्रेन युद्ध जैसे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा, जिसका असर स्थानीय व्यापार पर भी देखने को मिला। उन्होंने कहा कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि इससे महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक अस्थिरता बढ़ती है।

शीतल टंडन ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था और बिजली आपूर्ति में सुधार हुआ है, लेकिन स्मार्ट सिटी परियोजनाओं की धीमी गति से आम जनता और व्यापारियों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने शहर में बस अड्डे के निर्माण में हो रही देरी और रेलवे रोड से बसों के संचालन के कारण व्यापारियों को हो रही दिक्कतों पर भी चिंता जताई।

उन्होंने सरसावा हवाई पट्टी के उद्घाटन के बावजूद उड़ान शुरू न होने और सिटी बस सेवा के लंबित होने को भी प्रमुख मुद्दा बताया। उनका कहना था कि इन सुविधाओं के शुरू होने से व्यापार और आवागमन को गति मिलेगी।

बैठक में आयकर अधिनियम की धारा 43-बी (एच) में किए गए संशोधन पर भी व्यापारियों ने नाराजगी जताई। शीतल टंडन ने कहा कि 15 से 45 दिनों के भीतर भुगतान अनिवार्य करने का प्रावधान व्यवहारिक नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकारी विभाग स्वयं समय पर भुगतान नहीं करते, तो व्यापारियों पर इस प्रकार का दबाव डालना उचित नहीं है।

नुजूल संपत्तियों को लेकर बनी असमंजस की स्थिति पर भी चर्चा की गई। व्यापार मंडल ने सरकार से मांग की कि इन संपत्तियों को पहले की तरह फ्रीहोल्ड किया जाए, जिससे सरकार को राजस्व प्राप्त होने के साथ व्यापारियों को भी राहत मिल सके।

बैठक में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में कटौती का स्वागत किया गया, लेकिन इसके सरलीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया गया। साथ ही ऑनलाइन व्यापार के बढ़ते प्रभाव से छोटे व्यापारियों को हो रहे नुकसान पर भी चिंता व्यक्त की गई।

नगर निगम द्वारा हाउस टैक्स और वाटर टैक्स में की गई बढ़ोतरी को व्यापारियों ने अव्यवहारिक बताते हुए इसकी समीक्षा की मांग की। उनका कहना था कि बढ़ते कर और खर्चों के कारण छोटे व्यापारियों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि व्यापारियों की समस्याओं को लेकर संगठित रूप से आवाज उठाई जाएगी और आवश्यक होने पर आंदोलन भी किया जाएगा।

अंत में शीतल टंडन ने सभी व्यापारियों और अधिकारियों का सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए नए वित्तीय वर्ष 2026-27 में बेहतर व्यापारिक माहौल और समस्याओं के समाधान की उम्मीद जताई।

बैठक में जिला महामंत्री रमेश अरोड़ा, कोषाध्यक्ष कर्नल संजय मिड्ढा, मेजर एस.के. सूरी, पवन गोयल, रमेश डावर, संजय महेश्वरी, राजीव अग्रवाल, संदीप सिंघल, बलदेव राज खुंगर, अशोक मलिक, सतीश ठकराल, मुरली खन्ना, अभिषेक भाटिया और संजीव सचदेवा सहित अनेक व्यापारी प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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