शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। भारत सरकार की अटल वयो अभ्युदय योजना के अंतर्गत छुटमलपुर क्षेत्र के फतेहपुर भादो स्थित वृद्ध आश्रम में वरिष्ठ नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम समाज कल्याण विभाग के निर्देशानुसार दुआए फाउंडेशन (रजि.) द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें वृद्धजनों को उत्पादन आधारित गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आश्रम में रह रहे वरिष्ठ नागरिकों को व्यस्त रखते हुए उनमें आत्मविश्वास विकसित करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था। इस दौरान प्रतिभागियों को लिफाफे बनाना, सिलाई-कढ़ाई, जूट के बैग तैयार करना और टोकरी बुनाई जैसी उपयोगी गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया। इन गतिविधियों को वृद्धजनों की शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सरल और प्रभावी तरीके से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में प्रशिक्षकों द्वारा यह भी बताया गया कि तैयार किए गए उत्पादों को स्थानीय बाजारों में कैसे बेचा जा सकता है, ताकि वरिष्ठ नागरिक अपनी मेहनत से आय अर्जित कर सकें। इस कार्यशाला में आश्रम में निवास कर रहे बुजुर्गों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।
समाज कल्याण विभाग के प्रतिनिधियों ने इस योजना की सराहना करते हुए कहा कि सरकार द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के लिए चलाई जा रही यह पहल अत्यंत सराहनीय है। यह योजना न केवल बुजुर्गों को आत्मनिर्भर बनाती है, बल्कि उनके आत्मसम्मान को भी बढ़ाती है।
कार्यशाला में भाग लेने वाले ग्राम अलावलपुर निवासी अनूप सैनी ने कहा कि सरकार की यह योजना वरिष्ठ नागरिकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इससे बुजुर्गों में आत्मसम्मान की भावना जागृत होती है और वे आर्थिक रूप से भी सशक्त बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में सिखाए जा रहे उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग है, जिससे बुजुर्ग आसानी से आय अर्जित कर सकते हैं।
कार्यक्रम के संयोजक सचिन कुमार ने बताया कि किसी भी कार्य को सीखने से व्यक्ति की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के माध्यम से कच्चे माल की उपलब्धता, उत्पाद निर्माण और विपणन की पूरी प्रक्रिया की जानकारी मिलती है, जिससे व्यक्ति अपने उत्पादों को उचित मूल्य पर बेच सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इन उत्पादों की मांग स्थानीय बाजारों में ही उपलब्ध है, इसलिए बुजुर्गों को दूर जाने की आवश्यकता नहीं है।
कार्यक्रम के अंत में सचिन कुमार ने वृद्ध आश्रम के कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग के बिना यह कार्यशाला सफल नहीं हो सकती थी।
कार्यशाला में भाग लेने वालों में श्रीमती गंगा देवी, श्रीमती रुक्मणी गोयल, शिमला, संतोष, सुमित्रा, लीलावती, मंजू, महेंद्र, ज्ञानचंद, जयपाल सहित अन्य वरिष्ठ नागरिक शामिल रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में आश्रम के प्रबंधक देवी दत्त रिखारी, आर.एस. पांडे, प्रवीण मनमोहन, कल्याण, मंजू और नीलम का विशेष योगदान रहा।
यह कार्यशाला वरिष्ठ नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है।








