शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। सहारनपुर में आशा कार्यकर्ताओं की नियुक्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नवदृष्टि नवयुग ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष संजय वालिया ने स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि आशाओं की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है और पात्र अभ्यर्थियों की अनदेखी कर अपात्र लोगों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
पत्रकारों से वार्ता करते हुए संजय वालिया ने बताया कि केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक रोजगार पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जनपद में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली इन दावों के विपरीत नजर आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर नियमों के विरुद्ध चयन किया जा रहा है, जिससे पात्र लाभार्थियों के साथ अन्याय हो रहा है।
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि करिश्मा नाम की एक युवती का नाम चयन सूची में शामिल था और उसे फोन कर स्वास्थ्य केंद्र बुलाया गया। आरोप है कि वहां पहुंचने पर उससे रिश्वत की मांग की गई और मांग पूरी न होने पर उसके स्थान पर पूजा नाम की दूसरी युवती का चयन कर लिया गया। इस मामले को लेकर संगठन ने गहरी नाराजगी जताई है।
संजय वालिया ने यह भी दावा किया कि वर्तमान में सरसावा क्षेत्र में 10 आशा कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण चल रहा है, जिनमें से किसी भी प्रशिक्षु का प्रस्ताव संबंधित ग्राम प्रधान द्वारा नहीं दिया गया है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि पहले भी 9 आशाओं को प्रशिक्षण दिलाया गया था, लेकिन आज तक उनकी नियुक्ति नहीं की गई, जिससे वे भटकने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया नियमों के विपरीत है और इसमें पारदर्शिता की कमी साफ नजर आती है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो इससे शासन की छवि को भी नुकसान पहुंचेगा।
संजय वालिया ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और पात्र अभ्यर्थियों को ही प्रशिक्षण व नियुक्ति का अवसर दिया जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन के पदाधिकारी और पीड़ित अभ्यर्थी मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि अपात्र लोगों को प्रशिक्षण दिए जाने का संगठन विरोध करेगा और इस तरह की किसी भी प्रक्रिया को सफल नहीं होने दिया जाएगा।
इस पूरे मामले ने जनपद में आशा भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और पात्र अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने के लिए कौन से कदम उठाए जाते हैं।








