महावीर जयंती पर बंदी के आदेश के बावजूद ‘कबाबगढ़’ पर चिकन बिक्री का आरोप, सहारनपुर में कार्रवाई की मांग

महावीर जयंती पर यूपी सरकार के बंदी आदेश के बावजूद सहारनपुर में ‘कबाबगढ़’ पर चिकन बिक्री के आरोप लगे। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

थाना सदर बाजार क्षेत्र का समाचार

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। महावीर जयंती के उपलक्ष में 30 मार्च को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी आदेशों में स्पष्ट रूप से मीट, चिकन और मांस की दुकानों को बंद रखने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद जनपद में कोर्ट रोड स्थित ‘कबाबगढ़’ नामक प्रतिष्ठान पर चिकन बिक्री किए जाने के आरोप सामने आने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रशासन द्वारा जारी स्पष्ट निर्देशों के बावजूद उक्त दुकान पूरे दिन संचालित रही और वहां ग्राहकों को खुलेआम चिकन उपलब्ध कराया गया। इतना ही नहीं, आरोप है कि ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी चिकन के ऑर्डर सप्लाई किए गए, जो सीधे तौर पर सरकारी आदेशों की अवहेलना मानी जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, जिला प्रशासन ने महावीर जयंती के अवसर पर धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए पूरे जिले में मांस की दुकानों को बंद रखने के निर्देश जारी किए थे। अधिकांश दुकानदारों ने इन आदेशों का पालन करते हुए अपनी दुकानें बंद रखीं, लेकिन ‘कबाबगढ़’ पर लगे आरोपों ने नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय नागरिकों ने बताया कि संबंधित दुकान से कुछ ही दूरी पर चंद्र नगर पुलिस चौकी स्थित है। इसके बावजूद यदि इस प्रकार की गतिविधियां जारी रहती हैं, तो यह पुलिस और प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। लोगों का कहना है कि जब प्रशासन सख्ती की बात करता है, तो जमीनी स्तर पर उसका पालन सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।

निवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि दुकान संचालकों ने “अन्य कार्य” की आड़ लेकर मांस बिक्री जारी रखी। इससे यह स्पष्ट होता है कि कुछ लोग नियमों को दरकिनार कर अपने लाभ के लिए आदेशों का उल्लंघन कर रहे हैं। इससे उन व्यापारियों में भी असंतोष देखने को मिल रहा है, जिन्होंने नियमों का पालन करते हुए अपनी दुकानें बंद रखीं।

इस घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है और लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी भी देखने को मिल रही है। नागरिकों का कहना है कि यदि इस प्रकार के मामलों में समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में नियमों की अनदेखी की प्रवृत्ति और बढ़ सकती है। इससे कानून-व्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह के मामलों में उदाहरण पेश करने वाली कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति प्रशासनिक आदेशों को हल्के में लेने की हिम्मत न करे।

वहीं, प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यदि कहीं भी आदेशों का उल्लंघन हुआ है, तो उसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों की अवहेलना को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संबंधित विभागों को मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन ने आमजन से भी अपील की है कि वे ऐसे मामलों की जानकारी तुरंत संबंधित विभाग को दें, ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। जनसहभागिता के माध्यम से ही नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन संभव है।

यह मामला प्रशासनिक सख्ती और उसके वास्तविक क्रियान्वयन के बीच के अंतर को उजागर करता है। एक ओर जहां सरकार धार्मिक और सामाजिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए आदेश जारी करती है, वहीं दूसरी ओर कुछ स्थानों पर इनका पालन नहीं हो पाता, जिससे प्रशासन की साख प्रभावित होती है।

कुल मिलाकर, ‘कबाबगढ़’ से जुड़ा यह मामला केवल एक दुकान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम के क्रियान्वयन पर सवाल खड़ा करता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस रणनीति बनाई जाती है।

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