अरविंद कौशिक
शामली। प्रदेश में विद्युत विभाग द्वारा लागू की जा रही प्रीपेड मीटर व्यवस्था को लेकर आम उपभोक्ताओं और व्यापारी वर्ग में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। पारदर्शिता और सुविधा के उद्देश्य से शुरू की गई इस प्रणाली की वर्तमान कार्यप्रणाली अब लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। लगातार सामने आ रही तकनीकी खामियों और अव्यवस्थित संचालन के चलते उपभोक्ता खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल (पंजीकृत) के सहारनपुर मंडल अध्यक्ष अंकित जैन ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रीपेड मीटर प्रणाली वर्तमान स्वरूप में पूरी तरह से अव्यावहारिक साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि जैसे ही उपभोक्ता का बैलेंस समाप्त होता है, तुरंत प्रभाव से बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाती है। यह स्थिति विशेष रूप से व्यापारी वर्ग के लिए बेहद नुकसानदायक है, क्योंकि उनके व्यापारिक कार्य सीधे बिजली पर निर्भर होते हैं।
अंकित जैन के अनुसार, इस प्रणाली की सबसे बड़ी समस्या इसकी तकनीकी अस्थिरता है। विद्युत विभाग की वेबसाइट, मोबाइल ऐप और ऑनलाइन रिचार्ज प्लेटफॉर्म कई बार ठीक से काम नहीं करते। सर्वर डाउन होना, नेटवर्क की समस्या और तकनीकी गड़बड़ियों के कारण उपभोक्ता समय पर रिचार्ज नहीं कर पाते। ऐसी स्थिति में उपभोक्ता घंटों प्रयास करते रहते हैं, लेकिन जैसे ही बैलेंस खत्म होता है, बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली काट दी जाती है, जिससे उन्हें भारी असुविधा और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था न केवल व्यापारियों के लिए बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए भी परेशानी का कारण बन रही है। कई बार घरों में भी अचानक बिजली कटने से लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है, जो अत्यंत चिंताजनक है।
इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए व्यापार मंडल ने विद्युत विभाग और संबंधित उच्चाधिकारियों के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। उन्होंने मांग की है कि उपभोक्ताओं को रिचार्ज समाप्त होने से पहले कम से कम 48 से 72 घंटे पहले एसएमएस, कॉल या व्हाट्सएप के माध्यम से अलर्ट दिया जाए, ताकि वे समय रहते रिचार्ज कर सकें।
इसके अलावा, रिचार्ज समाप्त होने के बाद उपभोक्ताओं को कम से कम 72 घंटे का ग्रेस पीरियड दिया जाए, जिससे वे बिना किसी बाधा के भुगतान कर सकें और बिजली आपूर्ति बाधित न हो। व्यापार मंडल का मानना है कि यह सुविधा उपभोक्ताओं को बड़ी राहत प्रदान करेगी।
अंकित जैन ने यह भी कहा कि विभागीय वेबसाइट, मोबाइल ऐप और ऑनलाइन भुगतान प्रणाली को तकनीकी रूप से मजबूत और सुचारू बनाया जाना चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को बार-बार आने वाली तकनीकी समस्याओं से निजात मिल सके। साथ ही, ग्रामीण और नेटवर्क समस्याग्रस्त क्षेत्रों के लिए ऑफलाइन रिचार्ज केंद्रों की संख्या बढ़ाने की भी मांग की गई है।
उन्होंने आपात स्थिति के लिए इमरजेंसी बैलेंस या क्रेडिट सुविधा शुरू करने की भी मांग की है, जिससे उपभोक्ता अचानक बिजली कटने की स्थिति से बच सकें। उनका कहना है कि इस तरह की सुविधा से उपभोक्ताओं का भरोसा भी बढ़ेगा और प्रणाली अधिक उपयोगी साबित होगी।
व्यापार मंडल ने प्रशासन और विद्युत विभाग से अपील की है कि इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस प्रणाली में सुधार नहीं किया गया, तो उपभोक्ताओं और व्यापारियों की समस्याएं और बढ़ सकती हैं।
अंकित जैन ने बताया कि इन सभी मांगों के समर्थन में अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल, शामली द्वारा जल्द ही एक विस्तृत ज्ञापन संबंधित विभाग और मंत्रालय को भेजा जाएगा। इसके माध्यम से सरकार का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया जाएगा।
कुल मिलाकर, प्रीपेड मीटर व्यवस्था का उद्देश्य भले ही पारदर्शिता और सुविधा प्रदान करना रहा हो, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह उपभोक्ताओं के लिए चुनौती बनती जा रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और विद्युत विभाग इस पर क्या कदम उठाते हैं और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए क्या ठोस निर्णय लेते हैं।








