Saharanpur News नानौता में भाकियू का धरना, राकेश टिकैत की गिरफ्तारी के विरोध में किसानों का प्रदर्शन तेज

नानौता में भारतीय किसान यूनियन कार्यकर्ताओं ने राकेश टिकैत की गिरफ्तारी के विरोध में थाने पर धरना दिया। किसान नेताओं ने रिहाई तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी।

फैय्याज अली आब्दी 

नानौता। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत की उड़ीसा में गिरफ्तारी के विरोध में नानौता में किसानों का आक्रोश फूट पड़ा। भाकियू कार्यकर्ताओं ने ब्लॉक अध्यक्ष सूचित चौधरी के नेतृत्व में थाना प्रांगण में धरना प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

धरना प्रदर्शन के दौरान किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक राकेश टिकैत को रिहा नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। किसानों का कहना है कि यह गिरफ्तारी किसानों की आवाज को दबाने का प्रयास है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

धरने को संबोधित करते हुए भाकियू के नेता सूचित चौधरी ने कहा कि राकेश टिकैत उड़ीसा में चल रहे किसान आंदोलन में शामिल होने जा रहे थे, लेकिन वहां की पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नीतियों की विफलताओं को छुपाने के लिए इस तरह की कार्रवाई कर रही है।

उन्होंने कहा कि देश का किसान पहले से ही कई समस्याओं से जूझ रहा है, ऐसे में किसानों की आवाज उठाने वाले नेताओं को इस तरह गिरफ्तार करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है। उन्होंने दो टूक कहा कि जब तक राकेश टिकैत को रिहा नहीं किया जाएगा, तब तक भाकियू का धरना लगातार जारी रहेगा और आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

धरना स्थल पर मौजूद किसानों में खासा आक्रोश देखने को मिला। किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि यदि जल्द ही गिरफ्तारी वापस नहीं ली गई तो आंदोलन को जिला और प्रदेश स्तर पर भी विस्तारित किया जाएगा।

इस दौरान दीपक पंवार, नगराज टिकरौल, मोनू चौधरी, गुड्डन चौधरी, अनीस चौधरी, रामपाल चौधरी, रोहित पंवार, वैभव चौधरी, विपुल चौधरी, विक्रांत चौधरी, अक्षय कुमार सहित दर्जनों किसान धरना स्थल पर मौजूद रहे और आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई।

धरने के दौरान किसानों ने यह भी कहा कि भाकियू हमेशा किसानों के अधिकारों के लिए संघर्ष करता रहा है और आगे भी करता रहेगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि राकेश टिकैत की तत्काल रिहाई सुनिश्चित की जाए और किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए।

कुल मिलाकर नानौता में हुआ यह धरना किसानों के बढ़ते असंतोष का संकेत है। यदि समय रहते इस मामले का समाधान नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। किसानों ने साफ कर दिया है कि वे अपने नेता के सम्मान और अधिकारों के लिए किसी भी स्तर तक जाने को तैयार हैं।

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