सहारनपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रमुख जन गोष्ठी आयोजित, भारत के गौरवशाली इतिहास और चुनौतियों पर हुआ मंथन

सहारनपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रमुख जन गोष्ठी में भारत के इतिहास, संस्कृति और वर्तमान चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। पंच परिवर्तन संकल्प पर भी विशेष जोर दिया गया।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। महानगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में समाज, राष्ट्र निर्माण और वर्तमान चुनौतियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर गंभीर एवं व्यापक विमर्श किया गया। कार्यक्रम गांधी पार्क स्थित जनमंच सभागार में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।

 

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी ने अपने संबोधन में भारत के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि संस्कृति, साहस और वीरता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने मौर्य साम्राज्य, सम्राट अशोक तथा गुप्त काल को भारत का स्वर्णिम युग बताया। साथ ही मध्यकालीन संघर्षों में पृथ्वीराज चौहान, महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज के योगदान को भी विस्तार से रेखांकित किया।

उन्होंने आधुनिक इतिहास की चर्चा करते हुए 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को भारत की पहली संगठित क्रांति बताया और कहा कि यह आंदोलन राष्ट्र की एकता और स्वाभिमान का प्रतीक था। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि भारतीय इतिहास और संस्कृति को नई पीढ़ी तक सही रूप में पहुंचाना आवश्यक है।

प्रदीप जोशी ने बढ़ती जनसंख्या और सीमित संसाधनों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए समान नीति की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समाज को आत्मनिर्भर और जागरूक बनाकर ही राष्ट्र को सशक्त किया जा सकता है। साथ ही संघ के प्रति बनाए जा रहे नकारात्मक नैरेटिव को समाज द्वारा ही संतुलित करने की अपील की।

कार्यक्रम में प्रांत सह बौद्धिक शिक्षण प्रमुख सुनील ने संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर लिए गए “पंच परिवर्तन” संकल्प पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वाधारित जीवनशैली और नागरिक कर्तव्य जागरूकता जैसे पांच प्रमुख आयामों पर कार्य करना अत्यंत आवश्यक है। इन सिद्धांतों के माध्यम से समाज में एकता, अनुशासन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

गोष्ठी के दौरान अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। चौधरी रणधीर सिंह ने जनसंख्या संरचना में हो रहे बदलाव और विधि व्यवसाय से जुड़े लोगों के प्रतिनिधित्व की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों को आगे बढ़कर अपनी भूमिका निभानी होगी।

कार्यक्रम का शुभारंभ विभाग संघचालक राकेश वीर, महानगर संघचालक अशोक तथा कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. अनिल मलिक द्वारा भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर विभाग प्रचारक आशुतोष, विभाग कार्यवाह अरविंद त्यागी, महानगर कार्यवाह रमेश, सुधाकर अग्रवाल, डॉ. मिली पंत, निधि राणा, सुरेंद्र अग्रवाल, रविंद्र मिगलानी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन हरीश द्वारा किया गया। अंत में वंदे मातरम् के सामूहिक गान और “भारत माता की जय” के उद्घोष के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

यह गोष्ठी समाज में जागरूकता बढ़ाने, राष्ट्र निर्माण के प्रति लोगों को प्रेरित करने और वर्तमान चुनौतियों के समाधान पर सामूहिक चिंतन का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई।

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