शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। जनपद में एक राजनीतिक विवाद उस समय गहराता नजर आया जब भारतीय जनता पार्टी से जुड़े एक पदाधिकारी ने पूर्व महानगर अध्यक्ष पर पार्षद बनाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने का आरोप लगाया। मामले को लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, महानगर सहारनपुर के जनक मंडल मंत्री लक्ष्मण शास्त्री ने आरोप लगाया है कि उनका संपर्क भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष पुनीत त्यागी से हुआ था। आरोप है कि पुनीत त्यागी ने उन्हें नामित पार्षद बनाने का आश्वासन दिया और इसके एवज में 5 लाख रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें यह विश्वास दिलाया गया कि चुनाव लड़ने में अधिक खर्च और अनिश्चितता होती है, जबकि नामित पार्षद बनना सुनिश्चित कराया जा सकता है।
प्रार्थना पत्र के अनुसार, शिकायतकर्ता ने अलग-अलग माध्यमों से कुल 5 लाख रुपये की रकम दी, जिसमें ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, बैंक ट्रांसफर और नकद भुगतान शामिल बताया गया है। आरोप है कि रकम लेने के बाद लगातार आश्वासन दिया जाता रहा कि उनका नाम जल्द ही घोषित होगा, लेकिन समय बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
शिकायतकर्ता ने यह भी उल्लेख किया है कि इसी दौरान संबंधित नेता से जुड़ा एक विवाद सामने आने के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बावजूद उन्हें आश्वासन मिलता रहा, यहां तक कि कथित तौर पर एक व्यक्ति से बात करवाई गई जिसे संगठन का उच्चाधिकारी बताया गया।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब संबंधित पूर्व पदाधिकारी की गुमशुदगी की खबरें सामने आईं। शिकायतकर्ता ने गुमशुदगी की परिस्थितियों पर भी सवाल उठाते हुए इसे संदिग्ध बताया है। उनका कहना है कि परिवार द्वारा दी गई जानकारी और घटनाक्रम में कई विसंगतियां प्रतीत होती हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस प्रकार की घटनाएं केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकतीं और संभव है कि अन्य लोग भी इसी प्रकार ठगी का शिकार हुए हों। हालांकि, इन दावों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
शिकायतकर्ता ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच कराई जाए, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट की जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के मामलों से न केवल आम नागरिकों का विश्वास प्रभावित होता है, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगते हैं।
वहीं, इस पूरे मामले में अभी तक संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि प्राप्त शिकायत के आधार पर तथ्यों की जांच की जाएगी और उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कुल मिलाकर, यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला बड़े स्तर पर राजनीतिक और कानूनी प्रभाव डाल सकता है।








