आईआईटी रुड़की और लघु उद्योग भारती का सहयोग, सहारनपुर में लकड़ी व प्लास्टिक उत्पादों के नए डिजाइन होंगे विकसित

सहारनपुर में आईआईटी रुड़की और लघु उद्योग भारती के संयुक्त प्रयास से काष्ठ और प्लास्टिक उत्पादों के नए डिजाइन व नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। जनपद के औद्योगिक और हस्तशिल्प क्षेत्र को नई दिशा देने के उद्देश्य से आईआईटी रुड़की और लघु उद्योग भारती के संयुक्त तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य काष्ठ (लकड़ी) और प्लास्टिक उत्पादों में आधुनिक डिजाइन, नवाचार और व्यावसायिक संभावनाओं को बढ़ावा देना रहा।

पेपर मिल रोड स्थित आईआईटी रुड़की के सहारनपुर परिसर में आयोजित इस कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं संस्थान के कुलगीत के साथ हुआ। कार्यक्रम में लघु उद्योग भारती के मेरठ संभाग महासचिव अनुपम गुप्ता, मंडल अध्यक्ष अंकित गोयल, मंडल महामंत्री राजेश जैन, उद्योगपति सुधाकर अग्रवाल, जिलाध्यक्ष वरुण अग्रवाल, संयोजक राजेश गुप्ता सहित कई प्रमुख उद्यमी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

इस अवसर पर आईआईटी रुड़की सहारनपुर परिसर की डीन प्रो. मिली पंत, डिजाइन विभागाध्यक्ष प्रो. अपूर्व शर्मा तथा डीन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रो. इंदरदीप सिंह ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए संस्थान की विभिन्न योजनाओं, शोध गतिविधियों और उद्योगों के साथ सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

प्रो. अपूर्व शर्मा ने बताया कि नए स्थापित डिजाइन विभाग के अंतर्गत बी.डेस, एम.डेस और पीएचडी जैसे शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने डिजाइन अनुसंधान, उत्पाद विकास और औद्योगिक परामर्श से जुड़े कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि इन प्रयासों से स्थानीय उद्योगों को तकनीकी सहयोग मिलेगा और उनके उत्पाद वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।

प्रो. इंदरदीप सिंह ने एमएसएमई इकाइयों के लिए केंद्र सरकार और आईआईटी रुड़की द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि इन योजनाओं के माध्यम से छोटे और मध्यम उद्योगों को तकनीकी सहायता, डिजाइन सुधार और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिल रही है।

कार्यशाला के दौरान शिल्प आधारित संसाधन केंद्र की प्रो. स्मृति सारस्वत ने काष्ठ और हस्तशिल्प उत्पादों के डिजाइन एवं निर्माण से जुड़ी नवीन तकनीकों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सहारनपुर का लकड़ी उद्योग देश-विदेश में प्रसिद्ध है, और यदि इसमें आधुनिक डिजाइन व तकनीक का समावेश किया जाए तो इसकी मांग और अधिक बढ़ सकती है।

वहीं, प्रो. संजय पलसुले ने प्लास्टिक कंपोजिट तकनीक पर आधारित उत्पादों का प्रदर्शन करते हुए बताया कि किस प्रकार नई तकनीकों के माध्यम से टिकाऊ और आकर्षक उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने ‘पलसुले प्रोसेस’ के माध्यम से बनाए गए उत्पादों की विशेषताओं को भी साझा किया।

कार्यक्रम में आईआईटी रुड़की और लघु उद्योग भारती के बीच हुए एमओयू (समझौता ज्ञापन) के तहत काष्ठ, हस्तशिल्प और प्लास्टिक उत्पादों के व्यवसायीकरण और डिजाइन सुधार पर मिलकर कार्य करने की सहमति बनी। इससे स्थानीय उद्यमियों को न केवल नई तकनीक का लाभ मिलेगा, बल्कि उनके उत्पादों की बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी।

कार्यशाला में उपस्थित उद्योगपतियों जैसे मयंक अग्रवाल, राजीव चानना, आदेश बिंदल, सोम गोयल और श्रोया जैन ने अपने विचार रखते हुए इस पहल को उद्योगों के लिए अत्यंत लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सहयोग से पारंपरिक उद्योगों को नई पहचान मिलेगी और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

इसके अलावा आईआईटी रुड़की के डिजाइन, आर्किटेक्चर और पॉलिमर विभाग के शोध छात्र-छात्राओं ने भी सक्रिय भागीदारी की और विभिन्न तकनीकी विषयों पर अपने अनुभव साझा किए।

कार्यक्रम के अंत में यह निष्कर्ष निकला कि यदि शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के बीच इस प्रकार का सहयोग निरंतर बना रहे, तो सहारनपुर का पारंपरिक उद्योग आधुनिक तकनीक के साथ नई ऊंचाइयों को छू सकता है। यह पहल न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी, बल्कि भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे अभियानों को भी बल प्रदान करेगी।

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