सहारनपुर में दादा-दादी व नाना-नानी के महत्व पर निबंध प्रतियोगिता, छात्रों ने व्यक्त किए भावपूर्ण विचार

सहारनपुर के नेशनल पब्लिक स्कूल में सीनियर सिटीजन वेलफेयर सोसायटी व समाज कल्याण विभाग द्वारा निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई। छात्रों ने दादा-दादी व नाना-नानी के महत्व पर भावनात्मक विचार प्रस्तुत किए।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। समाज में पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सराहनीय पहल के तहत सीनियर सिटीजन वेलफेयर सोसायटी एवं समाज कल्याण विभाग द्वारा संयुक्त रूप से एक विशेष निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारत सरकार की अटल अभ्युदय योजना के अंतर्गत संचालित संवेदीकरण अभियान का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य नई पीढ़ी को बुजुर्गों के महत्व से अवगत कराना है।

यह प्रतियोगिता शहर के ज्वाला नगर स्थित नेशनल पब्लिक स्कूल में आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता का विषय “परिवारों में दादा-दादी व नाना-नानी का महत्व” रखा गया था। इस विषय के माध्यम से छात्रों को अपने परिवार के बुजुर्गों के प्रति भावनात्मक जुड़ाव और उनके योगदान को शब्दों में व्यक्त करने का अवसर मिला।

कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने अपने अनुभवों, भावनाओं और विचारों को बेहद संवेदनशील और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में कक्षा 7 की छात्रा आईशा नूर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। अपने निबंध में उन्होंने दादा-दादी की तुलना एक ऐसे वृक्ष से की, जो भले ही समय के साथ फल न दे, लेकिन जीवन के अंतिम समय तक अपनी छांव प्रदान करता रहता है। उनके इस भावपूर्ण विचार ने निर्णायकों को गहराई से प्रभावित किया।

द्वितीय स्थान कक्षा 6 की छात्रा अनन्या को मिला, जिन्होंने दादा-दादी को परिवार की जड़ों के समान बताया। उन्होंने अपने लेख में लिखा कि जैसे किसी वृक्ष की जड़ उसे मजबूती प्रदान करती है, उसी प्रकार परिवार में बुजुर्ग उसकी नींव होते हैं, जो पूरे परिवार को एकजुट रखते हैं।

तृतीय स्थान कक्षा 8 की छात्रा पावनी बजाज को प्राप्त हुआ। उन्होंने अपने निबंध में लिखा कि जब माता-पिता बच्चों की गलतियों पर उन्हें डांटते हैं, तब नाना-नानी उन्हें स्नेह और अपनापन देते हैं, जिससे बच्चों को मानसिक संबल मिलता है।

प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सभी विजयी छात्र-छात्राओं को संस्था की ओर से पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके अलावा, प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी छात्रों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया, जिससे उनका उत्साहवर्धन किया जा सके।

कार्यक्रम के दौरान सीनियर सिटीजन वेलफेयर सोसायटी के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष केएल अरोड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में तेजी से बढ़ते एकल परिवारों के चलन के कारण बच्चों को संयुक्त परिवार का वातावरण नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि परिवार में बुजुर्गों की उपस्थिति अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि वही बच्चों को संस्कार, नैतिक मूल्य और जीवन के अनुभव प्रदान करते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं बच्चों और बुजुर्गों के बीच भावनात्मक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इससे बच्चों में अपने परिवार के प्रति जिम्मेदारी और सम्मान की भावना विकसित होती है।

कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में पधारे पंडित अनिल कोदंड जी ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने छात्रों को भगवान श्रीराम से जुड़ा एक प्रेरणादायक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जीवन में माता-पिता के साथ-साथ दादा-दादी और नाना-नानी का स्थान भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के अनुभव और आशीर्वाद से ही व्यक्ति अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकता है।

विद्यालय के प्रधानाचार्य सुरेंद्र चौहान ने भी इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम छात्रों के सर्वांगीण विकास में सहायक होते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि नैतिक और सामाजिक मूल्यों का विकास भी उतना ही आवश्यक है।

इस अवसर पर संस्था अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा, संरक्षक यशपाल मलिक, विजय अरोड़ा, आरके जैन, प्रेम छोकरा, कोषाध्यक्ष संदीप गुप्ता, कार्यक्रम संयोजक अरुण सूरी, अजय अत्री, अरुण प्रकाश शर्मा, उषा गुप्ता, सुमन बाला गुप्ता सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में भाग लेने वाले छात्रों में तानिया, अंशिका, गगन, उज्जवल, रिधिमा, आरती, अवनी, सिमर, वंशिका, विधि, अर्पिता, अनन्या, जिया सहित कई अन्य छात्र-छात्राएं शामिल रहे। सभी ने इस प्रतियोगिता में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।

कुल मिलाकर यह आयोजन न केवल एक शैक्षिक गतिविधि रहा, बल्कि समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान और उनके महत्व को पुनः स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम भी साबित हुआ। इस प्रकार के प्रयासों से निश्चित रूप से नई पीढ़ी में पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों की भावना को बल मिलेगा तथा समाज में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

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