शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। जनपद के पिलखनी क्षेत्र स्थित महर्षि कश्यप ज्ञान आश्रम में महर्षि कश्यप जयंती के अवसर पर भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर आयोजित कथा, हवन और भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर अपनी आस्था व्यक्त की।
कार्यक्रम में मुख्य कथा व्यास के रूप में परम पूज्य बाबा कुल्हाड़े वाले उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने प्रवचनों के माध्यम से महर्षि कश्यप के जीवन, उनके आदर्शों और कश्यप समाज के गौरवशाली इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने ऋषि-मुनियों, साधु-संतों, वीर-शहीदों और समाज सुधारकों के योगदान को याद करते हुए समाज को एकजुट रहने का संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व विधान परिषद सदस्य एवं संयुक्त कश्यप महासभा (भारत) के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश कश्यप द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि महर्षि कश्यप जयंती जैसे आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। ऐसे कार्यक्रमों से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और इतिहास के बारे में जानने का अवसर मिलता है।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य कश्यप समाज की बिखरी हुई परंपराओं, संस्कृति और इतिहास को एक सूत्र में पिरोकर जन-जन तक पहुंचाना रहा। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक एकता, जागरूकता और भाईचारे का संदेश भी दिया गया।
धार्मिक अनुष्ठानों के तहत विधिवत हवन-पूजन किया गया, जिसके बाद कथा का आयोजन हुआ। अंत में भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन के दौरान भक्तिमय माहौल बना रहा और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
कार्यक्रम का आयोजन रेलवे रोड, पिलखनी स्थित भारतीय स्टेट बैंक के सामने महर्षि कश्यप ज्ञान आश्रम में किया गया। आश्रम के संस्थापक मांगेराम कश्यप (पूर्व प्रधान, सामाजिक चिंतक एवं वरिष्ठ समाजसेवी) सहित आयोजन समिति के सभी पदाधिकारियों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों से आए समाज के गणमान्य व्यक्तियों, युवाओं और महिलाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। आयोजन में शामिल लोगों ने इसे सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
कुल मिलाकर, महर्षि कश्यप जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज को एकजुट करने और अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में भी एक सराहनीय प्रयास साबित हुआ।








