सहारनपुर में स्कूलों पर सख्ती: किताबें, यूनिफॉर्म व जूते-मोजे बेचने पर होगी कार्रवाई, डीएम मनीष बंसल के सख्त निर्देश

सहारनपुर में डीएम मनीष बंसल ने स्कूलों को सख्त निर्देश दिए—किताबें, यूनिफॉर्म बेचने पर कार्रवाई, फीस स्ट्रक्चर अनिवार्य, वाहन फिटनेस और नए पोर्टल पर पंजीकरण जरूरी।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। नए शैक्षिक सत्र 2026-27 की शुरुआत के साथ ही जिला प्रशासन ने निजी विद्यालयों पर सख्ती बढ़ा दी है। जिलाधिकारी मनीष कुमार बंसल ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि कोई विद्यालय अपने परिसर में पाठ्य पुस्तकें, यूनिफॉर्म, जूते या मोजे बेचता पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए जुर्माना लगाया जाएगा।

कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठक में जनपद के सीबीएसई एवं आईसीएसई बोर्ड के विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अभिभावकों को राहत देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।

फीस स्ट्रक्चर जारी करना अनिवार्य

बैठक में जिलाधिकारी ने उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित विद्यालय फीस वृद्धि विनियम अधिनियम के तहत सभी स्कूलों को अवगत कराया कि फीस में किसी भी प्रकार की वृद्धि करने से पहले कम से कम 60 दिन पूर्व उसका विवरण जारी करना अनिवार्य है।

उन्होंने बताया कि अब तक केवल 47 विद्यालयों ने ही अपना फीस स्ट्रक्चर जारी किया है, जबकि 60 विद्यालयों ने ऐसा नहीं किया। ऐसे विद्यालयों को दो दिन के भीतर अपनी वेबसाइट पर फीस स्ट्रक्चर अपलोड करने और जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

एक ही दुकान से किताबें खरीदने का दबाव नहीं

जिलाधिकारी ने सख्त लहजे में कहा कि किसी भी विद्यालय द्वारा अभिभावकों को एक ही दुकान से किताबें खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। सभी विद्यालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि पाठ्य पुस्तकें विभिन्न दुकानों के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यम से भी उपलब्ध हों।

उन्होंने यह भी कहा कि बुक लिस्ट में यह जानकारी स्पष्ट रूप से अंकित की जाए, जिससे अभिभावकों को सुविधा मिल सके। नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

यूनिफॉर्म में बदलाव पर भी रोक

जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिया कि किसी भी विद्यालय में पांच वर्ष से पहले यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं किया जाएगा। यदि किसी कारणवश बदलाव आवश्यक हो, तो विद्यालय को संबंधित समिति के समक्ष ठोस कारणों सहित प्रस्ताव प्रस्तुत करना होगा और अनुमति प्राप्त करनी होगी।

शिकायत निवारण समिति का गठन

विद्यालयों को निर्देशित किया गया कि वे अभिभावकों और छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए एक ‘कठिनाई निवारण समिति’ का गठन करें। इस समिति में विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक और अभिभावकों को भी शामिल किया जाएगा।

यदि विद्यालय स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होता है, तो अभिभावक अपनी शिकायत जिलाधिकारी या जिला विद्यालय निरीक्षक को दे सकेंगे।

स्कूल वाहनों की फिटनेस पर भी जोर

बैठक में स्कूल वाहनों की सुरक्षा को लेकर भी अहम निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि सभी विद्यालय अपने वाहनों की फिटनेस अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करें और समय-समय पर एआरटीओ के माध्यम से उनकी जांच कराई जाए।

इसके साथ ही 1 अप्रैल से शुरू किए गए नए पोर्टल पर सभी स्कूलों को अपने वाहनों का पंजीकरण करना अनिवार्य किया गया है, ताकि वाहनों की पूरी जानकारी उपलब्ध रहे और उनकी निगरानी बेहतर तरीके से हो सके।

अधिकारियों और स्कूल प्रबंधकों की रही उपस्थिति

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी सुमित महाजन, जिला विद्यालय निरीक्षक अरविंद कुमार पाठक सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। साथ ही जनपद के प्रमुख विद्यालयों के प्रबंधक और प्रधानाचार्य भी बैठक में शामिल हुए।

अभिभावकों को मिलेगी राहत

प्रशासन के इन निर्देशों से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अक्सर स्कूलों द्वारा एक ही दुकान से महंगी किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव बनाया जाता था, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था।

कुल मिलाकर, सहारनपुर प्रशासन द्वारा उठाए गए ये कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और अभिभावकों को राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि इन निर्देशों का सख्ती से पालन किया गया, तो निजी विद्यालयों की मनमानी पर अंकुश लग सकेगा और शिक्षा प्रणाली अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बन सकेगी।

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