शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। मंडल में संचालित गौ आश्रय स्थलों की स्थिति और व्यवस्थाओं की समीक्षा को लेकर सर्किट हाउस में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पशुपालन विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार ने भाग लेते हुए गौशालाओं के संचालन, गोवंश संरक्षण और व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की।
बैठक की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी सुमित राजेश महाजन द्वारा की गई, जिसमें मंडल के सभी जिलों के संबंधित अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान स्थायी एवं अस्थायी गौ आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंश की संख्या और व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मंडल में कुल 49 अस्थायी गौ आश्रय स्थलों में 5455 गोवंश, 14 कान्हा गौशालाओं में 2110 गोवंश तथा 11 वृहद गौशालाओं में 5213 गोवंश संरक्षित हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर 13 हजार से अधिक गोवंश विभिन्न गौशालाओं में सुरक्षित रखे गए हैं। इसके अतिरिक्त 8623 गोवंश सहभागिता योजना के तहत लाभार्थियों को सुपुर्द किए गए हैं, जिससे गौ संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों को भी लाभ मिल रहा है।
बैठक में गौशालाओं के बेहतर संचालन के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सभी गौशालाओं में गोवंश का नियमित उपचार, टीकाकरण और टैगिंग अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही प्रत्येक आश्रय स्थल पर लॉग बुक, आय-व्यय रजिस्टर और अन्य आवश्यक रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से बनाए जाएं ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ब्लॉक स्तर पर भूसा खरीद की टेंडर प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। साथ ही गौशालाओं को गोचर भूमि से जोड़ने और जहां भूमि उपलब्ध नहीं है, वहां किसानों के सहयोग से हरे चारे की व्यवस्था करने पर जोर दिया गया।
बैठक में यह भी बताया गया कि कई स्थानों पर सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था लागू की जा चुकी है, जिससे गौशालाओं की सुरक्षा और निगरानी बेहतर हुई है। कब्जामुक्त कराई गई चारागाह भूमि पर नैपियर घास उगाने की योजना पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है, जिससे दीर्घकालिक रूप से चारे की समस्या का समाधान हो सके।
इसके अतिरिक्त सहभागिता योजना के तहत दिए गए गोवंश का समय-समय पर सत्यापन करने और संबंधित पोर्टल पर डेटा अपलोड करने के निर्देश दिए गए, ताकि लाभार्थियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।
बैठक में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), जिला पंचायत राज अधिकारी, उप निदेशक पंचायत, नगर निगम के पशु चिकित्सा अधिकारी सहित मंडल के सभी संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे और उन्होंने अपने-अपने विभागों से जुड़ी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।
कुल मिलाकर यह समीक्षा बैठक गौ संरक्षण व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। प्रशासन का उद्देश्य न केवल गोवंश को सुरक्षित आश्रय प्रदान करना है, बल्कि उनके स्वास्थ्य, पोषण और बेहतर प्रबंधन को भी सुनिश्चित करना है, जिससे प्रदेश में गौ कल्याण योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू किया जा सके।








