शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। जनपद में व्यापारियों के कथित उत्पीड़न और अवैध वसूली का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। राज्य कर विभाग के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पर व्यापारियों को डराकर धन उगाही करने के आरोप लगने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधि और व्यापारी वर्ग में नाराजगी बढ़ गई है। इसी क्रम में पार्षदों का एक प्रतिनिधिमंडल वरिष्ठ सपा नेता एवं पार्षद अभिषेक टिंकू अरोड़ा के नेतृत्व में राज्य कर विभाग के अधिकारियों से मिला और पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई।
प्रतिनिधिमंडल दिल्ली रोड स्थित राज्य कर विभाग के कार्यालय पहुंचा, जहां अधिकारियों से मुलाकात कर उन्हें मामले की गंभीरता से अवगत कराया गया। पार्षदों ने आरोप लगाया कि संबंधित कर्मचारी को केवल वाहन चलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि वह अपनी सीमाओं से बाहर जाकर व्यापारियों की चेकिंग कर रहा है और उन्हें डराकर अवैध वसूली में संलिप्त है। इस प्रकार की गतिविधियां न केवल नियमों के विरुद्ध हैं, बल्कि इससे व्यापारियों में भय और असुरक्षा का माहौल भी पैदा हो रहा है।
इस दौरान अभिषेक टिंकू अरोड़ा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी कीमत पर व्यापारियों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जांच और कार्रवाई का अधिकार केवल अधिकृत अधिकारियों को होता है, लेकिन यदि कोई कर्मचारी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम करता है और इसका दुरुपयोग करता है, तो यह पूरी तरह अनुचित और गैरकानूनी है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
सपा नेता ने यह भी कहा कि व्यापारी वर्ग देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जा सकता। यदि समय रहते इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो व्यापारी और जनप्रतिनिधि मिलकर बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
प्रतिनिधिमंडल में पार्षद इमरान सैफी, फहाद सलीम, नदीम अंसारी, नितिन जाटव, राजीव अन्नू, फजलुरहमान सहित कई अन्य लोग शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में प्रशासन से मांग की कि व्यापारियों के साथ हो रहे इस कथित उत्पीड़न को तत्काल रोका जाए और दोषियों को सख्त सजा दी जाए।
इस घटनाक्रम के बाद अब निगाहें राज्य कर विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह इस मामले में क्या कदम उठाता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर सकता है और व्यापारियों के हितों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो








