आईआईए प्रतिनिधिमंडल का अरुणाचल-असम दौरा, 16 एमओयू पर हस्ताक्षर से उद्योग-शिक्षा सहयोग को बढ़ावा

इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (IIA) के प्रतिनिधिमंडल ने अरुणाचल प्रदेश और असम का दौरा कर 16 एमओयू पर हस्ताक्षर किए, जिससे उद्योग और शिक्षा के बीच सहयोग मजबूत होगा।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गोयल के नेतृत्व में 25 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने परिवार सहित अरुणाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडीज का शैक्षिक एवं औद्योगिक दौरा किया। इस महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान आईआईए और विश्वविद्यालय के बीच कुल 16 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए, जो उद्योग और शिक्षा के बीच सहयोग को नई दिशा देने वाले माने जा रहे हैं।

इस कार्यक्रम में पासंग दोरजी सोना सहित नामसाई जिले के जनप्रतिनिधि, विश्वविद्यालय की प्रेजिडेंट गार्गी लोचन, चेयरमैन अश्वनी लोचन और वाइस चांसलर डॉ. झा मौजूद रहे। सभी ने इस पहल को क्षेत्रीय विकास और कौशल उन्नयन की दिशा में अहम कदम बताया।

दौरे के दूसरे चरण में प्रतिनिधिमंडल राजभवन गुवाहाटी पहुंचा, जहां लक्ष्मण प्रसाद आचार्य के आतिथ्य में भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर उद्योग आयुक्त नरेंद्र शाह ने असम के औद्योगिक विकास, निवेश संभावनाओं और नीतिगत सुधारों पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

आईआईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गोयल ने संगठन की गतिविधियों, उद्योगों की चुनौतियों और शिक्षा संस्थानों के साथ साझेदारी की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इस तरह के दौरे उद्योग और अकादमिक जगत के बीच सेतु का कार्य करते हैं। उन्होंने बताया कि एमओयू के माध्यम से स्किल डेवलपमेंट, रिसर्च और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने प्रतिनिधिमंडल के प्रयासों की सराहना करते हुए सभी सदस्यों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत में औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं हैं और ऐसे सहयोगात्मक प्रयास क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति देंगे।

प्रतिनिधिमंडल में प्रमोद मिगलानी, संजीव अरोड़ा, कृष्ण राजीव सिंघल, राजेश सपरा सहित कई प्रमुख उद्योगपति शामिल रहे। दौरे के समापन पर सभी सदस्यों ने कामाख्या मंदिर में दर्शन कर मां कामाख्या का आशीर्वाद प्राप्त किया।

यह दौरा उद्योग और शिक्षा के बीच समन्वय को मजबूत करने, युवाओं के कौशल विकास को बढ़ावा देने और पूर्वोत्तर राज्यों में निवेश की संभावनाओं को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के समझौते देश में संतुलित औद्योगिक विकास को गति देने में सहायक साबित होंगे।

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