शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। सहारनपुर रेलवे स्टेशन के प्रथम श्रेणी गेट पर रेलवे कर्मचारियों का आंदोलन लगातार पांचवें दिन भी जारी रहा। कर्मचारियों ने सरकार की कथित मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर रोष व्यक्त किया।
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि सरकार श्रमिकों के अधिकारों की अनदेखी कर रही है और श्रम कानूनों में बदलाव कर कर्मचारियों के हितों को कमजोर किया जा रहा है। यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, जिससे उनमें आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि नई पेंशन योजना लागू होने से कर्मचारियों का भविष्य असुरक्षित हो गया है और इससे उनके आर्थिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। कर्मचारियों ने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।
इसके अलावा रेलवे स्टेशन पर अधूरे पड़े निर्माण कार्यों को लेकर भी कर्मचारियों ने नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि स्टेशन के ऊपर लकड़ी के पुल के समानांतर एक नया पुल बनाया जा रहा है, जो लंबे समय से अधूरा पड़ा हुआ है। इस कारण यात्रियों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने मांग की कि इस पुल का निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूरा कराया जाए।
रेलवे कर्मचारियों ने प्लेटफार्मों की कमी को भी एक बड़ी समस्या बताया। उनका कहना है कि वर्तमान में प्लेटफार्मों पर अत्यधिक भीड़ रहती है, जिससे ट्रेनों को अक्सर आउटर पर खड़ा रहना पड़ता है। इससे यात्रियों को असुविधा होती है और समय भी बर्बाद होता है। यूनियन ने स्टेशन पर कम से कम दो नए प्लेटफार्म बनाए जाने की मांग उठाई।
यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं और जरूरत पड़ने पर बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
धरने के दौरान रामप्रीत, उपेंद्र गुप्ता, राजन वत्स, बाबूराम, रविंद्र कुमार, तारा चंद, जितेंद्र, ओम कुमार, मदनपाल, ओमप्रकाश, रोहित, याकूब, जमीर, हरेंद्र सहित कई नेताओं ने संबोधित किया और कर्मचारियों से एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने का आह्वान किया।








