शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस के अवसर पर स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. नैना मिगलानी ने मातृ स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था से लेकर प्रसव और प्रसव के बाद तक महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, उचित पोषण और नियमित जांच उपलब्ध कराना बेहद आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि भारत में हर वर्ष 11 अप्रैल को कस्तूरबा गांधी की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य मातृ मृत्यु दर को कम करना और गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के प्रति जागरूक करना है।
डॉ. मिगलानी के अनुसार सुरक्षित मातृत्व के छह प्रमुख स्तंभ होते हैं—परिवार नियोजन, प्रसव पूर्व देखभाल, सुरक्षित प्रसव, प्रसवोत्तर देखभाल, यौन संचारित रोगों की रोकथाम और एचआईवी जांच। इन सभी पहलुओं पर समुचित ध्यान देकर ही मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है।
उन्होंने सरकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को 6000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत प्रत्येक माह की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जांच और आवश्यक दवाइयों की सुविधा दी जाती है।
डॉ. मिगलानी ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, चिकित्सकीय परामर्श और समय पर इलाज बेहद जरूरी है। साथ ही प्रसव के समय प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की उपस्थिति और प्रसव के बाद मां और शिशु की समुचित देखभाल भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने यह भी बताया कि आज भी कई महिलाएं जागरूकता के अभाव में उचित स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रह जाती हैं, जिससे जटिलताएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे आकर महिलाओं को जागरूक करने की आवश्यकता है।
अंत में उन्होंने संदेश देते हुए कहा, “सुरक्षित मातृत्व, उज्ज्वल भविष्य की नींव है। हर मां महत्वपूर्ण है और हर जीवन की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है।”








