शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के लोकार्पण कार्यक्रम के बीच सहारनपुर का व्यापारी वर्ग भाजपा के जनप्रतिनिधियों और संगठन से नाराज़ नजर आ रहा है। व्यापारियों का आरोप है कि इतने बड़े कार्यक्रम के बावजूद उन्हें न तो आमंत्रित किया गया और न ही उनकी भागीदारी सुनिश्चित की गई।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 13 अप्रैल को सहारनपुर पहुंचे और यहां रात्रि विश्राम भी किया। इसके बाद 14 अप्रैल को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के लोकार्पण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान बड़े स्तर पर विभिन्न संगठनों को आमंत्रित किया गया था।
लेकिन सहारनपुर के व्यापारी संगठनों का कहना है कि उन्हें इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। व्यापारियों का आरोप है कि जिले के अधिकांश व्यापारिक संगठनों को किसी भी भाजपा जनप्रतिनिधि या संगठन की ओर से न्योता नहीं मिला।
व्यापारियों ने यह भी कहा कि यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का था, उन्हें आज तक प्रभारी मंत्री सुनील शर्मा से मिलने का अवसर नहीं मिला यदि अवसर मिलता तो हम व्यापारी वर्ग उनका स्वागत भी करते और व्यापारियों की कोई भी समस्या होती तो बताते।
जिला उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष एवं प्रभुजी की रसोई के सचिव शीतल टंडन ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सहारनपुर का व्यापारी वर्ग हमेशा भाजपा का समर्थक रहा है और चुनावों में पार्टी को खुलकर समर्थन देता आया है। इसके बावजूद व्यापारियों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि “हमारी भी अपेक्षाएं होती हैं कि जब कोई बड़ा नेता शहर में आए तो हमें भी आमंत्रण मिले, हम उनका स्वागत करें और अपने व्यापार से जुड़ी समस्याएं उनके सामने रखें। लेकिन पिछले छह वर्षों में हमें किसी भी कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया, जो बेहद निराशाजनक है।”
व्यापार मंडल से जुड़े अन्य पदाधिकारियों ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि व्यापारियों को इसी तरह नजरअंदाज किया जाता रहा, तो इसका असर आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
व्यापारियों का कहना है कि सरकार और जनप्रतिनिधियों को व्यापारिक वर्ग के योगदान को समझना चाहिए, क्योंकि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में व्यापारियों की अहम भूमिका होती है।
कुल मिलाकर, सहारनपुर में पीएम मोदी के कार्यक्रम के बाद जहां एक ओर विकास परियोजनाओं की चर्चा है, वहीं दूसरी ओर व्यापारी वर्ग की नाराजगी भी खुलकर सामने आ रही है, जो भाजपा के लिए एक अहम संकेत माना जा रहा है।








