शहरी चौपाल ब्यूरो
नागल (सहारनपुर), । सहारनपुर के नागल क्षेत्र के खेड़ा मुगल गांव में आयोजित बैठक में पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा और भारतीय किसान यूनियन वर्मा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने पृथक पश्चिम प्रदेश की मांग को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के करीब 8 करोड़ लोग एकजुट होकर अलग राज्य के निर्माण के लिए निर्णायक संघर्ष करें।
बैठक को संबोधित करते हुए भगत सिंह वर्मा ने कहा कि प्रस्तावित पश्चिम प्रदेश में 26 जिले शामिल होंगे और यहां शिक्षा तथा चिकित्सा व्यवस्था को पूरी तरह निशुल्क और बेहतर बनाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि अलग राज्य बनने पर क्षेत्र के युवाओं को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता दी जाएगी और बड़े उद्योग स्थापित होने से बेरोजगारी की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।
उन्होंने वर्तमान व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश की प्रथम श्रेणी सेवाओं में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की भागीदारी मात्र लगभग दो प्रतिशत है, जबकि अन्य श्रेणियों में भी यह हिस्सा बहुत कम है। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से क्षेत्र की उपेक्षा की जा रही है और यहां के लोगों को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है।
भगत सिंह वर्मा ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से सबसे अधिक कर संग्रह होने के बावजूद यहां न तो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान स्थापित किया गया है और न ही भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जैसे बड़े शैक्षणिक संस्थान खोले गए हैं। साथ ही न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय की पीठ की मांग वर्षों से लंबित है, जिसके कारण लोगों को न्याय के लिए प्रयागराज तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि वे आगे आएं और इस आंदोलन को मजबूत बनाएं। उन्होंने कहा कि यदि पश्चिम प्रदेश का गठन होता है तो मेरठ को इसकी राजधानी बनाया जाएगा और वहीं उच्च न्यायालय की पीठ सहित बड़े शैक्षणिक संस्थान स्थापित किए जाएंगे।
बैठक में यह भी बताया गया कि प्रस्तावित राज्य में 6 मंडल, 27 लोकसभा क्षेत्र और 137 विधानसभा क्षेत्र शामिल होंगे तथा भविष्य में इनकी संख्या में वृद्धि की संभावना भी रहेगी।
भगत सिंह वर्मा ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर संसद के विशेष सत्र में उत्तर प्रदेश के पुनर्गठन और पश्चिम प्रदेश के गठन पर विचार करने की मांग की है। उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सांसदों से भी अपील की कि वे इस मुद्दे को संसद में मजबूती से उठाएं।
उन्होंने कहा कि पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा अब इस आंदोलन को और तेज करेगा तथा गांव-गांव और शहर-शहर जाकर नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से जनसमर्थन जुटाया जाएगा।
बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजेंद्र चौधरी ने की। इस दौरान उन्होंने कहा कि पृथक राज्य की मांग समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है और इसके लिए व्यापक जनसंघर्ष जरूरी है। बैठक का संचालन प्रदेश सचिव मोहम्मद इरशाद मुखिया ने किया, जिन्होंने कहा कि आंदोलन को अब निर्णायक रूप दिया जाएगा और लक्ष्य प्राप्ति तक संघर्ष जारी रहेगा।
इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष पंडित नीरज कपिल, प्रदेश संगठन मंत्री धर्मवीर चौधरी, प्रदेश प्रवक्ता रोहित गौतम, प्रदेश सचिव मास्टर रईस अहमद, जिला संगठन मंत्री सुरेंद्र सिंह अधिवक्ता, जिला मंत्री मोहम्मद राशिद, मोहम्मद काला, मोहम्मद कुर्बान अली, महबूब हसन, हाजी बुद्धू हसन, हाजी साजिद, हाजी सुलेमान, जिला उपाध्यक्ष वसीम, जहीरपुर, प्रदेश सचिव रिशिपाल गुर्जर, कृष्ण कुमार, परविंदर सिंह, सुमित चौधरी, अमरदीप मान और मोहम्मद इलियास सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर, सहारनपुर में आयोजित इस बैठक के बाद पश्चिम प्रदेश की मांग को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के संकेत मिल रहे हैं और आने वाले समय में यह मुद्दा क्षेत्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।








