शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। जनपद में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत कथित फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार का मामला अब और गंभीर रूप लेता जा रहा है। बजरंग दल मेरठ प्रांत के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी द्वारा की गई शिकायत के बाद शुरू हुई जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं, जिनसे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
विकास त्यागी ने अपने शिकायती पत्र में आरोप लगाया था कि डूडा विभाग में कार्यरत एक एमआईएस कर्मचारी द्वारा फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी योजना का लाभ अपने चहेतों और परिजनों को दिलाया जा रहा है। आरोप है कि इस प्रक्रिया में फर्जी आधार कार्ड और कूटरचित अभिलेखों का इस्तेमाल कर सैकड़ों अपात्र लोगों को योजना का लाभ दिया गया, जिससे करोड़ों रुपये की सरकारी धनराशि का दुरुपयोग हुआ।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब विकास त्यागी ने आरोप लगाया कि जनपद में लगभग 14 हजार आवासों की डीपीआर तैयार की गई थी, जिनमें से करीब 12 हजार आवासों को स्वीकृति भी मिल चुकी है। लेकिन आरोप है कि इन स्वीकृत आवासों में मात्र 2 हजार ही वैध हैं, जबकि करीब 10 हजार आवासों को नियमों के विपरीत अवैध तरीके से स्वीकृत किया गया। यह आंकड़ा सामने आने के बाद पूरे मामले की गंभीरता कई गुना बढ़ गई है।
शिकायत के बाद जिलाधिकारी स्तर से तत्काल संज्ञान लेते हुए उप जिलाधिकारी सदर को जांच के निर्देश दिए गए। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि मामला जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) से संबंधित है, जिसके बाद पूरे प्रकरण को डूडा कार्यालय को भेजा गया। डूडा प्रशासन ने संबंधित एमआईएस अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा और जिला समन्वयक को निर्देशित किया कि सभी बिंदुओं पर तथ्यात्मक रिपोर्ट जल्द से जल्द प्रस्तुत की जाए।
जांच प्रक्रिया के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें लाभार्थियों की पात्रता संदिग्ध पाई गई। दस्तावेजों में विसंगतियां और अपूर्ण जानकारी ने फर्जीवाड़े की आशंका को और मजबूत किया है। प्रशासन अब इस पूरे नेटवर्क की गहनता से जांच कर रहा है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि इस कथित घोटाले में कितने लोग शामिल हैं और किस स्तर पर अनियमितताएं हुईं।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें सेवा से बर्खास्तगी, आपराधिक मुकदमा दर्ज करना और सरकारी धनराशि की रिकवरी जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
यह मामला एक बार फिर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है। जहां सरकार गरीबों को आवास उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है, वहीं इस तरह के आरोप योजनाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित करते हैं।
फिलहाल पूरे मामले की जांच अंतिम चरण में बताई जा रही है और जल्द ही विस्तृत रिपोर्ट सामने आ सकती है। अब सभी की नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या वास्तव में पात्र लोगों को उनका हक मिल पाएगा।।








