Saharanpur News: 11 बजे का छड़ी बसेरा, 12:30 बजे शुरू हुआ कार्यक्रम; मुस्लिम पार्षदों ने बनाई दूरी, सपा पार्षद भी रहे नदारद

नगर निगम के छड़ी बसेरा कार्यक्रम का समय सुबह 11 बजे था, लेकिन मुख्य अतिथि के करीब 12:30 बजे पहुंचने के बाद कार्यक्रम शुरू हुआ। मुस्लिम पार्षदों ने दूरी बनाई और सपा पार्षद भी नजर नहीं आए।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। ऐतिहासिक मेला गुघाल की धार्मिक परंपराओं का सोमवार को नगर निगम परिसर में आयोजित छड़ी बसेरा कार्यक्रम के साथ शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के लिए सुबह 11 बजे का समय निर्धारित किया गया था, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग निर्धारित समय से पहले ही नगर निगम परिसर में पहुंच गए। हालांकि मुख्य अतिथि महापौर डॉ. अजय कुमार सिंह करीब 12:30 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, जिसके बाद कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई। करीब डेढ़ घंटे तक कार्यक्रम शुरू होने का इंतजार करते लोगों को तेज गर्मी में परेशानी का सामना करना पड़ा।

नगर निगम परिसर में छड़ी पूजन और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। इसके बाद बाबा जाहरवीर गोगाजी के निशान माड़ी स्थल पर चढ़ाने की तीन दिवसीय धार्मिक परंपरा शुरू हुई। 21 से 23 सितंबर तक निशान चढ़ाए जाएंगे। इसके बाद छड़ियां वापस सहारनपुर लौटकर भैरव देव मंदिर के पास एकत्रित होंगी और बाबा जाहरवीर गोगाजी की स्मृति में दस दिवसीय मेला गुघाल आयोजित किया जाएगा।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष मांगे राम, महापौर डॉ. अजय कुमार सिंह, नगर विधायक राजीव गुंबर, नगर निगम उपसभापति मयंक गर्ग, मेला संयोजक संजय सैनी, ज्योति अग्रवाल, पार्षद दिग्विजय चौहान, नितिन जाटव, वीर सिंह, सरदार राजेंद्र सिंह कोहली और कार्यक्रम संयोजक मुकेश गक्कड़ सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम के दौरान महापौर डॉ. अजय कुमार सिंह ने कहा कि मेला गुघाल सहारनपुर की ऐतिहासिक परंपरा और आस्था से जुड़ा आयोजन है। यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का संदेश भी देता है। उन्होंने सभी वर्गों से एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने और मेले को शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने में सहयोग की अपील की।

नगर विधायक राजीव गुंबर ने कहा कि मेला गुघाल सहारनपुर की पहचान से जुड़ी पुरानी परंपरा है। ऐसे आयोजन समाज में प्रेम, सद्भाव और आपसी सम्मान को मजबूत करने का अवसर देते हैं। उन्होंने आम जनता से मेले के दौरान शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की।

कार्यक्रम संयोजक मुकेश गक्कड़ ने कहा कि मेले का उद्देश्य आस्था के साथ समाज में एकता और भाईचारे का संदेश देना भी है। उन्होंने कहा कि सहारनपुर की जनता को इस परंपरा को मिल-जुलकर आगे बढ़ाना चाहिए तथा मेले में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का सम्मान करना चाहिए।

उधर, सहारनपुर में चल रहे मस्जिद प्रकरण के विरोध में मुस्लिम पार्षदों द्वारा नगर निगम के मेला कार्यक्रमों के बहिष्कार की बात भी सामने आई। इसी के चलते मुस्लिम पार्षद छड़ी बसेरा कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। हालांकि कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने अपने संबोधनों में सामाजिक सौहार्द, आपसी सम्मान और हिंदू-मुस्लिम एकता बनाए रखने पर जोर दिया।

छड़ी बसेरा कार्यक्रम के बाद बाबा जाहरवीर गोगाजी के निशान माड़ी स्थल पर चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हो गई। तीन दिन तक वहां धार्मिक आयोजन होंगे। इसके बाद छड़ियां वापस मेला स्थल पर भैरव देव मंदिर के पास पहुंचेंगी और नगर निगम द्वारा आयोजित दस दिवसीय मेला गुघाल की शुरुआत होगी। मेले में विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सहारनपुर की इस पुरानी परंपरा में अलग-अलग समुदायों के लोग भाग लेते रहे हैं, जिससे यह आयोजन शहर के सामाजिक सौहार्द और साझा संस्कृति का भी प्रतीक माना जाता है।

 

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