Saharanpur News: देवबंद त्यागी ब्राह्मण महाकुंभ में राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग, मांगे राम त्यागी की चेतावनी

देवबंद में त्यागी ब्राह्मण महाकुंभ में राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक सम्मान की मांग उठी। मांगे राम त्यागी ने उचित भागीदारी नहीं मिलने पर आर-पार की लड़ाई की चेतावनी दी। बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से जाम लगा।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

देवबंद। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पश्चिमी उत्तर प्रदेश दौरे के कुछ ही सप्ताह बाद देवबंद में आयोजित त्यागी ब्राह्मण महाकुंभ ने क्षेत्र की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। रविवार को मां त्रिपुर बाला सुंदरी की पावन धरा पर आयोजित महाकुंभ में बड़ी संख्या में समाज के लोग पहुंचे। मंच से राजनीतिक प्रतिनिधित्व, सामाजिक सम्मान और समाज की एकजुटता के मुद्दे उठाए गए। त्यागी भूमिहार ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मांगे राम त्यागी के आर-पार की लड़ाई वाले बयान ने आयोजन को राजनीतिक दृष्टि से भी चर्चा में ला दिया।

 

मांगे राम त्यागी ने भाजपा पर लगाए उपेक्षा के आरोप

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष मांगे राम त्यागी ने भाजपा पर त्यागी ब्राह्मण समाज की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि समाज के सम्मान और राजनीतिक भागीदारी से समझौता नहीं किया जाएगा। यदि समाज को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला तो आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। उनके बयान के जरिए समाज की राजनीतिक अपेक्षाओं और प्रतिनिधित्व की मांग को प्रमुखता से उठाया गया।

राघव लखनपाल शर्मा ने एकजुटता का किया आह्वान

महाकुंभ में पहुंचे पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा ने त्यागी ब्राह्मण समाज को राष्ट्रवादी बताते हुए कहा कि समाज ने हमेशा देशहित में योगदान दिया है। उन्होंने समाज के लोगों से एकजुट रहने और अपनी सामूहिक ताकत बनाए रखने का आह्वान किया।

जिला अध्यक्ष सुशील त्यागी, वरिष्ठ समाजसेवी जुगनू त्यागी, मनीष त्यागी और प्रदेश अध्यक्ष सुधीर त्यागी सहित अन्य वक्ताओं ने भी समाज की एकता, सम्मान और राजनीतिक भागीदारी पर जोर दिया। सुधीर त्यागी ने कहा कि ब्राह्मण समाज एक है और हमेशा एकजुट रहेगा।

ट्रैक्टर-ट्रॉली और कारों से पहुंचे लोग, लगा जाम

महाकुंभ में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, कारों और अन्य वाहनों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। वाहनों की बढ़ती आवाजाही के कारण देवबंद के कई मार्गों पर कई घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही। इससे स्थानीय लोगों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

महाकुंभ में उमड़ी भीड़ और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर उठे सवालों के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में समाज की मांगों को लेकर चर्चा तेज हुई है। हालांकि, इस आयोजन का भाजपा की आगामी राजनीतिक रणनीति या चुनावी समीकरणों पर क्या असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।

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