सहारनपुर का चिल्ड्रेन होम बना देश के लिए मिसाल, डीएम मनीष बंसल की पहल ने बदली बच्चों की जिंदगी

सहारनपुर में डीएम मनीष बंसल के नेतृत्व में चिल्ड्रेन होम का कायाकल्प किया गया। नागरिक समाज और CSR सहयोग से बच्चों के लिए सुरक्षित, आधुनिक और प्रेरणादायक वातावरण तैयार किया गया।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर, । सहारनपुर में बाल संरक्षण और बाल कल्याण के क्षेत्र में एक नई और ऐतिहासिक पहल देखने को मिली है। जिला प्रशासन के संवेदनशील नेतृत्व में जिला चिल्ड्रेन होम का व्यापक नवीनीकरण और उन्नयन कर इसे एक मॉडल संस्थान के रूप में विकसित किया गया है। इस पूरे अभियान का नेतृत्व जिलाधिकारी मनीष बंसल ने किया, जिसका उद्देश्य बच्चों को केवल आश्रय नहीं बल्कि एक सुरक्षित, सम्मानजनक और प्रेरणादायक वातावरण उपलब्ध कराना है।

यह परियोजना केवल भवन सुधार तक सीमित नहीं रही, बल्कि बच्चों के समग्र विकास—शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक—को केंद्र में रखकर तैयार की गई है। इसमें नागरिक समाज, कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी रही, जिससे यह पहल एक सफल पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के रूप में सामने आई है।

इस परियोजना में CIS और IMA जैसी संस्थाओं ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया, वहीं स्थानीय समाजसेवियों और दानदाताओं ने भी बच्चों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई।

डीएम मनीष बंसल ने इस पूरे प्रोजेक्ट की नियमित मॉनिटरिंग की और समय-समय पर स्थल निरीक्षण कर कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित की। उन्होंने आर्किटेक्ट्स के साथ समन्वय कर चाइल्ड-फ्रेंडली डिजाइन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए, जिससे संस्थान का वातावरण बच्चों के अनुकूल बन सके।

नवीनीकरण के तहत चिल्ड्रेन होम में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। नए डॉर्मिटरी ब्लॉक में बेहतर वेंटिलेशन और प्राकृतिक रोशनी की व्यवस्था की गई है, साथ ही प्रत्येक बच्चे के लिए अलग बेड, गद्दा, तकिया और बेडशीट की सुविधा सुनिश्चित की गई है, जिससे सामूहिक व्यवस्था की जगह अब गरिमापूर्ण जीवन का माहौल तैयार हुआ है।

शिक्षा को रोचक बनाने के लिए “बिल्डिंग ऐज़ लर्निंग एड (BALA)” तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसके तहत दीवारों को शैक्षिक चित्रों और ज्ञानवर्धक पेंटिंग्स से सजाया गया है। यह भवन अब स्वयं एक इंटरैक्टिव लर्निंग टूल बन गया है।

बच्चों के लिए एक्टिविटी एरिया, लाइब्रेरी, इनडोर गेम्स, टीवी आधारित शैक्षिक कार्यक्रम, आधुनिक रसोईघर, स्वच्छ डाइनिंग हॉल और सुरक्षित पेयजल व्यवस्था जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। प्रशासनिक कार्यों के लिए भी कार्यालय और केयरटेकर स्टाफ की सुविधाओं को बेहतर किया गया है।

नागरिक समाज की भागीदारी ने इस परियोजना को और मजबूत बनाया है, जहां चिकित्सकों, समाजसेवियों और कॉर्पोरेट संस्थाओं ने मिलकर बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और मनोरंजन के लिए निरंतर सहयोग दिया।

इस प्रयास के परिणामस्वरूप बच्चों के जीवन स्तर, आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। यह चिल्ड्रेन होम अब केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि एक “घर जैसा वातावरण” बन चुका है

यह मॉडल दर्शाता है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति, पेशेवर योजना और समाज का सहयोग एक साथ हो, तो सामाजिक परिवर्तन को प्रभावी और स्थायी बनाया जा सकता है।

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