नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी युद्ध के असर अब आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरतों पर भी साफ दिखने लगे हैं। तेल और गैस की बढ़ती कीमतों के बीच अब बोतलबंद पानी भी महंगा हो गया है। देश की प्रमुख कंपनियों ने पानी की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार ईरान और अमेरिका-इस्राइल के बीच जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इसका सीधा असर प्लास्टिक उत्पादों पर पड़ा है, जिससे पानी की बोतलों और पैकेजिंग सामग्री की लागत बढ़ गई है। इसी कारण बोतलबंद पानी की कीमतों में करीब 8 से 11 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है।
देश की प्रमुख कंपनी बिसलेरी ने अपने एक लीटर पानी के कैरेट की कीमत 216 रुपये से बढ़ाकर 240 रुपये कर दी है। कंपनी का कहना है कि पैकेजिंग सामग्री की लागत में भारी बढ़ोतरी के चलते यह फैसला लेना पड़ा। पिछले कुछ समय में पैकेजिंग से जुड़े कच्चे माल की कीमतों में 70 प्रतिशत तक उछाल देखा गया है।
इसी तरह पार्ले एग्रो और अन्य कंपनियों ने भी पानी की कीमतों में बढ़ोतरी की है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि प्लास्टिक बोतलों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पॉलिमर की लागत में करीब 50 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। ढक्कन, लेबल और पैकिंग सामग्री के दाम भी तेजी से बढ़े हैं, जिससे कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ गया है।
गौरतलब है कि सरकार ने सितंबर 2025 में बोतलबंद पानी पर जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया था, जिससे कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद थी। हालांकि, मौजूदा हालात में बढ़ती लागत के कारण कंपनियां उस राहत को बरकरार नहीं रख पा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं। फिलहाल, आम उपभोक्ताओं को अब पीने के पानी के लिए भी अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।








