नई दिल्ली | मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध संकट के बीच नरेंद्र मोदी ने रविवार को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। इस उच्च स्तरीय बैठक में देश की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और आम नागरिकों की जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए कई बड़े फैसले लिए गए।
बैठक में स्पष्ट संदेश दिया गया कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत में तेल, गैस और आवश्यक वस्तुओं की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। कैबिनेट सचिव ने मौजूदा वैश्विक हालात और सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की, जिस पर प्रधानमंत्री ने सभी विभागों को एकजुट होकर काम करने के निर्देश दिए।
सरकार ने खाद्य, ऊर्जा और ईंधन की सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है, ताकि देश में किसी भी तरह की कमी की स्थिति उत्पन्न न हो। आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए किसानों के लिए खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी निर्णय लिया गया है, साथ ही जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से आपूर्ति की तैयारी की जा रही है।
देश में बिजली आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने के लिए सभी पावर प्लांटों में कोयले के पर्याप्त भंडार की समीक्षा की गई और यह सुनिश्चित किया गया कि औद्योगिक और घरेलू क्षेत्रों में बिजली कटौती की नौबत न आए। इसके साथ ही केमिकल, फार्मा और पेट्रोकेमिकल क्षेत्रों के लिए कच्चे माल के आयात हेतु नए स्रोत तलाशने और भारतीय उत्पादों के लिए नए वैश्विक बाजार विकसित करने की योजना बनाई गई है।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त नजर रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने राज्य सरकारों के साथ समन्वय बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में आम जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
बैठक में “संपूर्ण सरकार” दृष्टिकोण अपनाने का निर्णय लिया गया है, जिसके तहत मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों का एक विशेष समूह बनाया जाएगा जो बदलती वैश्विक स्थिति पर लगातार नजर रखेगा और आवश्यक कदम उठाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक संघर्ष लगातार बदल रहा है और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता यह है कि देश के नागरिकों को इसका न्यूनतम प्रभाव झेलना पड़े और हर स्थिति में उनकी सुरक्षा व सुविधा सुनिश्चित की जाए।








