लखनऊ। Yogi Adityanath की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जनता, किसानों और उद्योगों को सीधे लाभ पहुंचाने वाले कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। सरकार ने एक ओर किसानों के लिए गेहूं खरीद और भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाया है, वहीं दूसरी ओर छोटे शहरों के विकास और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए भी ठोस कदम उठाए हैं।
किसानों के हित में सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2585 प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में ₹160 अधिक है। प्रदेश में 30 मार्च से 15 जून तक गेहूं खरीद की जाएगी। कृषि मंत्री Surya Pratap Shahi ने बताया कि खरीद के लिए प्रदेश भर में 6500 क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे और आठ एजेंसियां इस प्रक्रिया में शामिल होंगी। किसानों को उतराई, छनाई और सफाई के लिए ₹20 प्रति क्विंटल अतिरिक्त भुगतान मिलेगा तथा 48 घंटे के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। पूरी खरीद प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है, जिससे पारदर्शिता और सुविधा दोनों बढ़ेंगी। सरकार ने गेहूं खरीद का लक्ष्य 30 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन कर दिया है और अब तक 1.95 लाख से अधिक किसान पंजीकरण करा चुके हैं।
इसके साथ ही प्रदेश के छोटे शहरों के विकास के लिए नवयुग पालिका योजना को मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत 58 नगर निकायों को स्मार्ट सिटी की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। अगले पांच वर्षों में इस पर ₹2916 करोड़ खर्च किए जाएंगे, जबकि हर वर्ष लगभग ₹583 करोड़ विकास कार्यों पर लगाए जाएंगे। इस योजना के माध्यम से डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा मिलेगा और शहरों में बेहतर आधारभूत सुविधाएं, पार्क, ऑडिटोरियम तथा आधुनिक बिजली व्यवस्था विकसित की जाएगी। नगर विकास मंत्री A. K. Sharma के अनुसार, शहरों को उनकी जनसंख्या के आधार पर दो श्रेणियों में बांटकर योजनाबद्ध तरीके से विकास कार्य कराए जाएंगे।
औद्योगिक विकास को गति देने के लिए कैबिनेट ने अयोध्या, गोरखपुर, रायबरेली, फतेहपुर और मिर्जापुर में कुल ₹3540 करोड़ के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी है। औद्योगिक विकास मंत्री Nand Gopal Gupta Nandi ने बताया कि इन निवेशों से प्रदेश में नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित होंगी, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए ₹566.77 करोड़ की SGST प्रतिपूर्ति को भी स्वीकृति दी गई है।
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 में संशोधन को भी मंजूरी दी है, जिससे भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को आसान बना दिया गया है। अब यदि किसी भूखंड का नक्शा प्राधिकरण द्वारा पास हो जाता है तो उसी को भूमि उपयोग परिवर्तन माना जाएगा और अलग से प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होगी। वित्त मंत्री Suresh Kumar Khanna ने कहा कि इस निर्णय से न केवल आमजन को राहत मिलेगी, बल्कि निवेशकों के लिए भी प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनेगी, जिससे प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
सरकार के इन फैसलों को किसानों की आय बढ़ाने, छोटे शहरों को आधुनिक बनाने और निवेश के जरिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये निर्णय उत्तर प्रदेश को आर्थिक और बुनियादी ढांचे के स्तर पर तेजी से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।








