मनोज मिड्ढा
सहारनपुर। शहर में बैंकट हॉलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में महाराजा पैलेस में लगी भीषण आग, उसके कुछ दिनों बाद दिल्ली रोड स्थित ग्रैंड रिजॉर्ट में गैस रिसाव से आग लगने की घटना और फिर होटल पंजाब में आग लगने की ताजा घटना ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने यह चिंता और बढ़ा दी है कि कहीं शहर के बैंकट हॉल किसी बड़े हादसे का इंतजार तो नहीं कर रहे।महाराजा पैलेस में लगी आग में भले ही कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। राहत की बात यह रही कि घटना के समय कोई कार्यक्रम नहीं चल रहा था, अन्यथा सैकड़ों लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी। इसी तरह ग्रैंड रिजॉर्ट में गैस पाइपलाइन से रिसाव के चलते आग लगने की सूचना ने लोगों को दहला दिया। हालांकि रिसॉर्ट प्रबंधन ने समय रहते आग पर काबू पा लिया, लेकिन यह घटना भी बड़े खतरे की चेतावनी थी।। शहर के प्रसिद्ध पंजाब होटल में अचानक भीषण आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग लगते ही होटल परिसर में मौजूद लोगों में दहशत फैल गई और जान बचाने के लिए लोग इधर-उधर भागने लगे। गनीमत रही कि समय रहते सभी लोगों ने बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।
हालांकि आग लगने के कारणों का अभी तक स्पष्ट रूप से पता नहीं चल सका है। प्रारंभिक आशंका शॉर्ट सर्किट या गैस रिसाव की जताई जा रही है, लेकिन अधिकारी जांच के बाद ही वास्तविक कारण सामने आने की बात कह रहे हैं। पुलिस और फायर विभाग की टीम मामले की जांच में जुटी हुई है।
शहर के अधिकांश बैंकट हॉल सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर संचालित हो रहे हैं। कई स्थानों पर अग्निशमन यंत्र या तो नहीं हैं या अनुपयोगी स्थिति में पड़े हैं। आपातकालीन निकास द्वार या तो बंद रहते हैं या बनाए ही नहीं गए हैं। गैस पाइपलाइन और विद्युत वायरिंग की नियमित जांच का अभाव भी गंभीर चिंता का विषय है, जो कभी भी बड़े हादसे को जन्म दे सकता है।
इन बैंकट हॉलों में एक-एक कार्यक्रम में हजारों लोगों की भीड़ एकत्र होती है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं। न तो भीड़ प्रबंधन की कोई ठोस व्यवस्था होती है और न ही आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद रहता है। ऐसे में किसी भी अप्रिय घटना के दौरान भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है।
पार्किंग की समस्या भी खतरे को और बढ़ा रही है। अधिकांश बैंकट हॉलों में पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था नहीं है, जिससे आयोजनों के दौरान सड़कों पर लंबा जाम लग जाता है। ऐसी स्थिति में यदि आग जैसी कोई आपात घटना होती है, तो फायर ब्रिगेड या एम्बुलेंस समय पर मौके तक नहीं पहुंच पाती।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बैंकट हॉल राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक मिलीभगत के चलते बिना आवश्यक मानकों को पूरा किए ही संचालित हो रहे हैं। नियमों की अनदेखी कर खुलेआम व्यापार किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग मौन बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी बैंकट हॉलों का निष्पक्ष सुरक्षा ऑडिट कराया जाए, तो अधिकांश मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि बिना अग्निशमन विभाग की एनओसी, आपात निकासी व्यवस्था और नियमित निरीक्षण के किसी भी बैंकट हॉल को संचालन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
लगातार हो रही घटनाएं साफ संकेत दे रही हैं कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। शहरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी बैंकट हॉलों का तत्काल सर्वे कराया जाए और मानकों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।








