कानपुर के केशवपुरम क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल में अवैध किडनी प्रत्यारोपण रैकेट का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पिछले करीब दो वर्षों से इस अस्पताल में बिना वैध अनुमति के किडनी ट्रांसप्लांट किए जा रहे थे। इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन को भी हैरान कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, इस रैकेट में दिल्ली, मेरठ, नोएडा सहित एनसीआर के विभिन्न क्षेत्रों से मरीजों और डोनरों को लाया जाता था। दलालों के माध्यम से पूरे नेटवर्क को संचालित किया जा रहा था, जो जरूरतमंद मरीजों को अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध कराते थे।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई में इस पूरे गिरोह के कई अहम पहलुओं का खुलासा हुआ है। जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल के पास किडनी ट्रांसप्लांट करने की कोई वैध अनुमति नहीं थी, बावजूद इसके यहां लगातार सर्जरी की जा रही थीं।
बताया जा रहा है कि इसी वर्ष 3 मार्च को दक्षिण अफ्रीका की एक महिला का किडनी प्रत्यारोपण भी इसी अस्पताल में किया गया था। ऑपरेशन के बाद महिला को पहले कल्याणपुर के एक नर्सिंग होम में रखा गया और बाद में उसे दिल्ली होते हुए नोएडा के एक निजी अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां उसका लंबे समय तक इलाज चला।
जांच एजेंसियों के अनुसार अब तक इस अस्पताल में कम से कम सात किडनी ट्रांसप्लांट किए जाने की पुष्टि हुई है। यह भी सामने आया है कि सर्जरी करने वाली टीम अपने साथ जरूरी उपकरण लेकर आती थी और अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में अस्थायी व्यवस्था बनाकर ऑपरेशन को अंजाम देती थी।
इस पूरे मामले में अस्पताल के कुछ कर्मचारियों की संलिप्तता भी सामने आई है, जो शहर के विभिन्न अधिकृत और अनधिकृत नर्सिंग होम से जुड़े हुए थे। इनके माध्यम से मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाता था, जिससे पूरे नेटवर्क को संचालित करना आसान हो जाता था।
सूचना मिलने के बाद क्राइम ब्रांच, खुफिया विभाग और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए इस रैकेट का पर्दाफाश किया। हालांकि अभी तक कई आरोपी फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।
प्रशासन का कहना है कि इस मामले में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में इस प्रकार की अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
यह मामला न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है, बल्कि अवैध अंग प्रत्यारोपण जैसे गंभीर अपराध पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस रैकेट से जुड़े और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।








