यूपी भाजपा में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल तय, प्रदेश टीम और निगम-बोर्ड नियुक्तियों पर मंथन तेज

उत्तर प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक पुनर्गठन तेज हो गया है। जिला इकाइयों के बाद अब प्रदेश टीम और निगम-बोर्ड नियुक्तियों पर मंथन चल रहा है, आगामी चुनाव को देखते हुए सामाजिक संतुलन पर जोर दिया जा रहा है।

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में संगठनात्मक पुनर्गठन की प्रक्रिया अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। जिला इकाइयों के गठन के बाद अब पार्टी का पूरा फोकस प्रदेश टीम के गठन और विभिन्न आयोगों, निगमों व बोर्डों में रिक्त पदों पर नियुक्तियों को लेकर मंथन पर है। आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी नेतृत्व सामाजिक संतुलन और कार्यकर्ताओं के समायोजन को प्राथमिकता दे रहा है।

शुक्रवार को पार्टी मुख्यालय में इस संबंध में लंबी बैठक आयोजित की गई, जिसमें पंकज चौधरी, धर्मपाल सिंह, केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में संभावित नामों पर चर्चा के साथ-साथ संगठन में बड़े बदलाव की रूपरेखा पर भी विचार-विमर्श किया गया।

जिला इकाइयों का गठन लगभग पूरा

भाजपा ने उत्तर प्रदेश को 98 संगठनात्मक जिलों में विभाजित किया हुआ है। इनमें से करीब 90 जिलों में जिला कार्यकारिणी का गठन पूरा हो चुका है। हालांकि अभी कुछ जिलों में जिलाध्यक्षों की घोषणा बाकी है, जिनमें देवरिया, अंबेडकर नगर, गोरखपुर महानगर, वाराणसी जिला और चंदौली शामिल हैं।जिला इकाइयों के गठन के बाद अब पार्टी की नजर प्रदेश संगठन की नई टीम तैयार करने और विभिन्न आयोगों, निगमों व बोर्डों में खाली पड़े पदों को भरने पर है।

 प्रदेश टीम और नियुक्तियों पर मंथन

सूत्रों के अनुसार, प्रदेश भाजपा मुख्यालय में हुई बैठक में इन मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। पार्टी लंबे समय से प्रतीक्षित संगठनात्मक बदलाव को अमल में लाने की तैयारी में है।करीब तीन दर्जन आयोगों, निगमों और बोर्डों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इन पदों पर नियुक्तियां कर पार्टी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की योजना बनाई जा रही है।

 सामाजिक संतुलन पर विशेष फोकस

आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा सामाजिक समीकरणों को साधने पर विशेष ध्यान दे रही है। पार्टी की रणनीति है कि विभिन्न वर्गों, क्षेत्रों और समुदायों के कार्यकर्ताओं को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए, ताकि चुनावी समीकरण मजबूत किए जा सकें।

बैठक में यह भी तय किया गया कि संगठन में ऐसे कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने लंबे समय से पार्टी के लिए काम किया है और जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ रखते हैं।

बंद कमरे में भी हुई चर्चा

बैठक के अलावा प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री ने अलग से बंद कमरे में भी इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। सूत्रों का कहना है कि इस दौरान कई महत्वपूर्ण नामों पर सहमति बनाने की कोशिश की गई।

 चुनाव से पहले बड़ा संदेश

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संगठनात्मक पुनर्गठन आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की रणनीति का अहम हिस्सा है। इससे पार्टी न केवल अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करेगी, बल्कि नए चेहरों को भी मौका देकर चुनावी माहौल को मजबूत बनाने का प्रयास करेगी।कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश भाजपा में चल रहा यह मंथन आने वाले दिनों में बड़े संगठनात्मक बदलाव का संकेत दे रहा है, जिसका सीधा असर प्रदेश की राजनीति और आगामी चुनावों पर देखने को मिल सकता है।

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