शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। जनपद के विकास खंड नानौता स्थित छछरौली गांव में जल जीवन मिशन के अंतर्गत संचालित पेयजल योजना के पूर्ण होने के बाद प्रभाव आकलन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान सर्वे टीम ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर योजना के प्रभाव, लाभ और उनकी संतुष्टि का विस्तृत मूल्यांकन किया।
कार्यक्रम में Shakambhari University के प्रोफेसरों एवं छात्र-छात्राओं की टीम ने सक्रिय भागीदारी की। टीम ने घर-घर जाकर ग्रामीणों से बातचीत की और यह जानने का प्रयास किया कि योजना के लागू होने के बाद उनके दैनिक जीवन में क्या बदलाव आए हैं। सर्वे के दौरान जल की गुणवत्ता, घर-घर नल कनेक्शन की स्थिति, पानी की उपलब्धता और उपयोग से जुड़ी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया गया।
ग्रामीणों ने बताया कि योजना के लागू होने से उन्हें अब स्वच्छ पेयजल के लिए दूर-दूर नहीं जाना पड़ता, जिससे विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को बड़ी राहत मिली है। पहले जहां पानी की कमी एक बड़ी समस्या थी, वहीं अब नियमित जलापूर्ति से जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आया है। कई ग्रामीणों ने यह भी कहा कि इससे समय की बचत हुई है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी कमी आई है।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के सहायक अभियंता, अवर अभियंता और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। इसके अलावा परियोजना से जुड़े प्रतिनिधि, डीसी डीपीएमयू टीम के सदस्य दीपक यादव सहित कई कर्मचारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल हुए। ग्राम प्रधान, ग्रामीणों और विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।
अधिकारियों ने बताया कि इस प्रभाव आकलन का मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने की योजना कितनी सफल रही है। इसके साथ ही योजना से जुड़े संभावित सुधारों और चुनौतियों को भी समझने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि भविष्य में और बेहतर कार्य किया जा सके।
सर्वे टीम ने विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी एकत्र करने के बाद प्रारंभिक तौर पर योजना के क्रियान्वयन पर संतोष व्यक्त किया। ग्रामीणों द्वारा साझा किए गए अनुभवों ने यह स्पष्ट किया कि योजना का लाभ जमीनी स्तर पर लोगों तक पहुंच रहा है और इससे उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है।
अधिशासी अभियंता, उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) सहारनपुर ने बताया कि इस प्रकार के आकलन कार्यक्रम से योजनाओं की वास्तविक स्थिति का सही आकलन होता है। इससे यह भी पता चलता है कि किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है और किन पहलुओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर घर तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है, जिसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है।
कुल मिलाकर, छछरौली पेयजल योजना का यह प्रभाव आकलन कार्यक्रम न केवल योजना की सफलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि सरकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन ग्रामीण जीवन में किस प्रकार सकारात्मक बदलाव ला सकता हैं ।








