शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। आर्थिक तंगी और विपरीत पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद शहर के युवा खिलाड़ी अर्णव ने अपनी मेहनत, लगन और जुनून के दम पर यूपी अंडर-14 क्रिकेट टीम में चयनित होकर एक मिसाल पेश की है। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे सहारनपुर के लिए गर्व का विषय बन गई है।
अर्णव की सफलता के पीछे एक बेहद संघर्षपूर्ण कहानी छिपी है। जहां एक ओर उनकी मां व्हीलचेयर पर हैं, वहीं पिता पैरालिसिस जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, लेकिन इन कठिन हालातों ने अर्णव के हौसले को कभी कमजोर नहीं होने दिया। बल्कि उन्होंने इन चुनौतियों को अपनी ताकत बनाया और क्रिकेट के मैदान में खुद को साबित किया।
इस प्रेरणादायक यात्रा का सबसे भावुक पहलू यह है कि अर्णव की मां कुसुम, खुद व्हीलचेयर पर बैठकर बेटे को गेंदबाजी कराती हैं, ताकि वह बेहतर बल्लेबाजी की प्रैक्टिस कर सके। मां का यह समर्पण और बेटे की मेहनत मिलकर एक ऐसी कहानी रच रहे हैं, जो हर किसी को प्रेरित करती है।
अर्णव ने करीब चार साल पहले क्रिकेट खेलना शुरू किया था। अन्य बच्चों को खेलते देखकर उनके मन में भी क्रिकेटर बनने का सपना जगा। आर्थिक तंगी के बावजूद उनकी मां ने उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें नालंदा क्रिकेट एकेडमी में दाखिला दिलाया। इसके बाद अर्णव की दिनचर्या बेहद कठिन हो गई।
वह रोज सुबह करीब पांच किलोमीटर साइकिल चलाकर स्कूल जाते, फिर घर लौटकर खाना खाने के बाद सीधे क्रिकेट प्रैक्टिस के लिए निकल जाते। दिन-रात की इसी कड़ी मेहनत ने उन्हें आज इस मुकाम तक पहुंचाया है।
यूपी अंडर-14 टीम में चयन के बाद अर्णव ने अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया। उनकी बल्लेबाजी तकनीक, आत्मविश्वास और खेल के प्रति समर्पण ने उन्हें टीम में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बना दिया है।
अर्णव खुद को एक राइट हैंड बल्लेबाज बताते हैं और भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी विराट कोहली और रोहित शर्मा को अपना आदर्श मानते हैं। उनका सपना है कि वह एक दिन भारतीय टीम में खेलकर देश का नाम रोशन करें।
अर्णव की मां कुसुम का कहना है कि बेटे के अंदर शुरू से ही कुछ अलग करने का जुनून था। उन्होंने हर मुश्किल परिस्थिति में भी उसे आगे बढ़ने से नहीं रोका। उन्होंने सहारनपुर डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन और चेयरमैन मोहम्मद अकरम का भी आभार जताया, जिनके सहयोग और मार्गदर्शन से अर्णव को आगे बढ़ने का अवसर मिला।
अर्णव की यह सफलता उन सभी युवाओं के लिए एक प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं। यह कहानी बताती है कि यदि हौसले बुलंद हों और परिवार का साथ मिले, तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।







